नहरबंदी के विरोध में सारी रात धरने पर डटे रहे किसान
सड़क पर ही बनाया रात का लंगर, गर्मी के कारण रहा बुरा हाल
नौ अगस्त से पहले पानी छोड़ने की बात न मानने पर अनिश्चितकालीन धरने का एलान
अमर उजाला ब्यूरो
अबोहर। राजस्थान और हरियाणा की सीमा के साथ लगते पंजाब के किसानों को सिंचाई पानी देने वाली मलूकपुरा और लंबी माइनर बंद कर दिया गया। इससे गुस्साए 12 से अधिक गांवों के सैकड़ों किसानों की ओर से शुक्रवार को अबोहर-हनुमानगढ़ राजमार्ग पर शुरू किया गया अनिश्चितकालीन चक्का जाम सारी रात जारी रहा। शनिवार सुबह होते ही बड़ी संख्या में अन्य किसान भी मौके पर पहुंच गए। रात के समय पुलिस भी किसानों के साथ मौजूद रही।
भाकियू कादियां के नेता सुभाष भागसर ने बताया कि 24 घंटे बीतने के बाद भी नहरी विभाग ने उनकी सुध नहीं ली। रात के समय धरनास्थल पर करीब 100 किसान मौजूद थे। उनकेलिए मौके पर ही लंगर व चाय की व्यवस्था की गई। दिन भर धूप के कारण तपती हुई सड़क पर यह किसान सारी रात गर्मी से बेहाल रहे लेकिन मोर्चा नहीं छोड़ा। इनका कहना है कि जब तक नहरी विभाग उनकी नहरों में पानी नही छोड़ता तब तक वे धरना जारी रखेंगे। शनिवार सुबह होते ही दोबारा बड़ी संख्या में किसान धरनास्थल पर पहुंच गए व सरकार और नहरी विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इधर प्रशासन ने इस मार्ग से आने वाले वाहनों को दूसरे रास्तों से निकालने का प्रबंध किया। दोपहर करीब 1 बजे विभाग के एससी लाभ सिंह चहल, एसडीएम पूनम सिंह, एक्सईएन मुख्तयार सिंह राणा धरनास्थल पर पहुंचे और किसान नेता सुभाष भागसर, सुखमंदर सिंह, विनोद डूडी व जयपाल मंडा ने यूनियन नेताओं से बैठक की। इसमें अधिकारी 9 अगस्त से पहले पानी छोड़ने पर सहमत नहीं हुए तो किसान नेताओं ने अनिश्चितकालीन धरना जारी रखने का एलान कर दिया।
नहरी विभाग की ओर से वीरवार बाद दोपहर मलूकपुरा और लंबी माइनर बंद करने से रामसरा, कीकरखेड़ा व दौलतपुरा माइनरें भी बंद हो गई हैं। गांव भागसर, भागू, कुलार, राजपुरा, शेरेवाला, बिश्रपुरा, खैरपुर, अमरपुरा, बहाववाला, रामसरा, शेरगढ़, पटीसदीक और झोरड़खेड़ा दर्जनों गांवों के किसान सिंचाई पानी से वंचित हो गए। धरनाकारी किसानों का कहना है कि नरमा की फसल में नहरी पानी न मिलने के कारण वह दिन-रात ट्यूबवेल चलाकर हजारों का डीजल फूंक रहे हैं। जब तक विभाग नहरों में पानी नहीं छोड़ेगा तब तक उनका चक्का जाम जारी रहेगा। वहीं सिंचाई विभाग ने डैम में घटते जलस्तर को देखते हुए रोटेशन के हिसाब से नहरों में पानी देने का कार्यक्रम तय किया है।
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