सफेदे के 42 हरेभरे पेड़ों को काटने पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
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वन मंत्रालय, एडवाइजर, निगम कमिश्नर सहित अन्य को नोटिस, 20 नवंबर तक जवाब मांगा
लॉ स्टूडेंट ने इन पेड़ों को बचाने के लिए हाईकोर्ट में दाखिल की है जनहित याचिका
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने शहर के हरेभरे 42 सफेदे के पेड़ों को काटने पर रोक लगा दी है। इन पेड़ों को खतरनाक बताते हुए 6 लाख रुपये में इनकी कटाई का ठेका प्रशासन ने जारी किया था। पेड़ों को काटने पर रोक के साथ ही हाईकोर्ट ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, प्रशासक के सलाहकार, नगर निगम और हॉर्टीकल्चर विभाग को 20 नवंबर के लिए नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है।
चंडीगढ़ के लॉ स्टूडेंट जहनगीत सिंह ने एडवोकेट अलोक जग्गा के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि हाल ही में उसने सेक्टर-27 में एक हरेभरे सफेदे के पेड़ को काटते हुए देखा था। पता चला कि पिछले साल रेंज फारेस्ट ऑफिसर ने इन पेड़ों को देखकर कहा था कि इनकी जड़ें खोखली हो गई हैं और अब यह खतरनाक हो गए हैं जो कभी भी भारी बरसात या अंधी में गिर सकते हैं। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि रेंज फारेस्ट ऑफिसर ने बिना किसी वैज्ञानिक प्रमाण के लिए इन पेड़ों की जड़ों को खोखला बता दिया जबकि यह सभी पेड़ पूरी तरह से हरेभरे हैं। यहां तक की इस वर्ष हुई भारी बरसात जिसने की पिछले दस साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया, उसमें भी इन पेड़ों को कोई नुकसान नहीं हुआ। बावजूद इसके 42 पेड़ों को खतरनाक बता काटा जा रहा है।
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इन 42 पेड़ों की कटाई का 6 लाख में दिया ठेका
हाईकोर्ट को बताया गया कि शहर के इन 42 पेड़ों की कटाई का ठेका महज 6 लाख रुपये में एक ठेकेदार को दे दिया गया है। वह भी बिना किसी तय प्रक्त्रिस्या के। वैसे भी जिन 42 पेड़ों की कटाई की जा रही है वह काफी बड़े हैं और यह 6 लाख से कहीं ज्यादा महंगे हैं। फिर भी बेहद ही सस्ते में इन पद्यों की कटाई का ठेका दे दिया गया। तय प्रावधान है कि अगर कोई पेड़ कटा जाता है तो उससे पांच गुना ज्यादा पेड़ लगाने होते हैं। इस लिहाज से इन 42 पेड़ों की कटाई पर 210 पेड लगाए जाने चाहिए थे जोकि नहीं किया गया। इन 42 हरेभरे पेड़ों की जगह 210 नए पेड़ नहीं ले सकते।
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ग्रेनरी में देश के पहले दस शहरों में शुमार है शहर
हाईकोर्ट को बताया गया कि ग्रीनरी के लिहाज से चंडीगढ़ देश के पहले दस शहरों में शामिल है। बावजूद इसके अब शहर में हरेभरे पेड़ों की कटाई कर न सिर्फ शहर की हरियाली पर ग्रहण लगाया जा रहा है बल्कि शहर का पर्यावरण भी आहात किया जा रहा है। शहर में सड़कों पर आने वाले पेड़ों की टहनियों की कटाई की जा रही है, जो जरूरी भी है लेकिन सफेदे जैसा पेड़ जो काफी ऊंचा होने के बाद भी फैलाव वाला नहीं होता उसकी कटाई समझ के बाहर है।