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नहीं रहे मनोचिकित्सक के भीष्म पितामह डाङ विग

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मुफ्त क्लीनिक चलाने वाले मनोचिकित्सा के भीष्म पितामाह डा. विग नहीं रहे

कार्डियक अरेस्ट के बाद निधन, पीजीआई के एडवांस कार्डियक सेंटर में एडमिट थे
भारत सहित अंतराष्ट्रीय स्तर पर थी ख्याति, मेंटल हेल्थ प्रोग्राम विकसित करने में अहम योगदान


अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। भारतीय मनोचिकित्सा के दिग्गज व पीजीआई के मनोचिकित्सा डिपार्टमेंट के पूर्व एचओडी डा. एनएन विग का वीरवार को निधन हो गया। कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें पीजीआई के एडवांस कार्डियक सेंटर में दाखिल कराया गया था। मेंटल हेल्थ व डिस्आर्डर सहित भारतीय मनोचिकित्सा के क्षेत्र में उनका अहम योगदान रहा है। मानसिक बीमारियों के जितने बड़े चिकित्सक थे, उतनी ही गहराइयों से मरीजों का दर्द समझते थे। उनका एक सपना था कि मेंटल हेल्थ के इलाज की सुविधाएं गरीबों तक भी पहुंचे। अपने सपने को जीने के लिए उन्होंने रिटायरमेंट के बाद सेक्टर 15 स्थित लाजपत राय भवन में मुफ्त क्लीनिक शुरू किया। 20 सालों तक चले इस क्लीनिक में उन्होंने 30 हजार से ज्यादा मरीजों का इलाज किया।

पीजीआई में साइकेएट्री डिपार्टमेंट की स्थापना की
डा. विग ने लखनऊ के केजी मेडिकल कालेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की। साल 1987 में लखनऊ यूनिवर्सिटी से एमडी मेडिसिन। उसके बाद आल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ मेंटल हेल्थ (निम्हांस) बंगलूरू में ट्रेनिंग की। वहां से वापस आने पर लखनऊ मेडिकल कालेज में न्यूरोसाइक्रेट्री डिपार्टमेंट में लेक्चरर के पद पर ज्वाइन किया। वहां पर उन्होंने भारत की पहली जनरल हास्पिटल साइकेएट्री यूनिट खोली। साल 1961-62 में उन्होंने इंग्लैंड व स्कॉटलैंड से साइकोलॉजिक्ल मेडिसिन में डिप्लोमा की पढ़ाई। साल 1963 में उन्होंने पीजीआई ज्वाइन किया। यहां पर उन्होंने साइकेएट्री डिपार्टमेंट की स्थापना की। साल 1963 से लेकर 1980 तक डिपार्टमेंट के एचओडी रहे। वे आल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस नई दिल्ली के भी एचओडी रहे। साल 1984 से लेकर 1990 तक वे मिस्त्र स्थित ईएमआरओ के रीजनल आफिस स्थित मेंटल हेल्थ के रीजनल एडवाइजर रहे। इसके दायरे में रीजन के 22 देश आते हैं, जहां पर मेंटल हेल्थ प्रोग्राम को विकसित करने थे।
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कुछ इस तरह बने भीष्म पितामाह
पीजीआई के मनोचिकित्सक डिपार्टमेंट के एचओडी प्रो. अजीत अवस्थी ने बताया कि प्रो. विग के नेतृत्व में पीजीआई का मनोचिकित्सा डिपार्टमेंट ट्रेनिंग और रिसर्च के क्षेत्र में देश का नंबर वन सेंटर बना। भारत में नेशनल मेंटल हेल्थ प्रोग्राम का उन्होंने एक माडल पंचकूला के रायपुररानी में तैयार किया, जिसके आधार पर कई विकासशील देशों में प्रोग्राम शुरू किए गए। प्रो. विग पहले सदस्य थे, जिन्होंने मेंटल डिस्आर्डर पर फोकस किया और भारत में मेंटल डिस्आर्डर को समझा भी। उन्होंने मनोचिकित्सक डिस्आर्डर का वर्गीकरण किया। इसके अलावा वे 1968 से लेकर 1973 तक भारतीय मनोचिकित्सक सोसाइटी जनरल सेक्रेटरी। नोसोलॉजी, कल्चर बाउंड सिंड्रोम, मनोविज्ञान और मनोचिकित्सा के क्षेत्र में होने वाली रिसर्च में भी उनका अहम योगदान रहा है। अंतरराष्ट्रीय मनोचिकित्सा के क्षेत्र में भी उनका यादगार काम रहा है। वे डब्ल्यूएचओ के मेंटल हेल्थ की एडवाइजरी पैनल के सदस्य थे।
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बताया गया कि डा. एनएन विग नवंबर 2017 से बीमार चल रहे थे। उसके बाद कार्डियक अरेस्ट के शिकार हो गए। इसके बावजूद वे काम से पीछे नहीं हटते थे। तीन दिन वे सीएमसी हास्पिटल में बैठते थे, जबकि दो दिन चैरिटी क्लीनिक में बैठते थे। इसी साल फरवरी में उन्होंने हास्पिटल में जाना बंद कर दिया था। बीते रविवार को उन्हें पीजीआई के एडवांस कार्डियक सेंटर में दाखिल कराया गया था। उनका अंतिम संस्कार सेक्टर 25 में दो बजे होगा। उनके दो बेटे हैं। एक बेटा सिदार्थ विग आर्किटेक्ट है, जो पंचकूला में रहते हैं, जबकि दूसरा बेटा अनीश विग स्विट्जरलैंड में।
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