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चंडीगढ़ : 1200 शिक्षकों को एसीपी का इंतजार... मौत के 19 माह बाद भी प्रिंसिपल को एसीपी जारी नहीं की, मानवाधिकार आयोग ने तलब की रिपोर्ट

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चंडीगढ़। हरियाणा शिक्षा विभाग में अध्यापकों को एसीपी (एसोर कैरियर प्रोग्रेेसन) के लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। जिला मुख्यालयों द्वारा समय पर फाइल भेजे जाने के बावजूद कई-कई माह तक मामले पंचकूला स्थित मुख्यालय में लंबित हैं। इस समय पीजीटी अध्यापकों के 1200 से अधिक केस पेंडिंग हैं। वहीं, करनाल निवासी एक महिला प्रिंसिपल का तो एसीपी के इंतजार में निधन हो चुका है। निधन के कई माह बाद भी उनको एसीपी नहीं दी गई। इस मामले में हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने निदेशक शिक्षा विभाग को नोटिस भेज रिपोर्ट तलब की है।
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बता दें कि सरकारी कर्मचारियों को नौकरी के 8, 16 और 24 साल की सर्विस पूरी करने पर एसीपी मिलती है। इसके तहत कर्मचारी के बेसिक वेतन पर 3 प्रतिशत का इंक्रीमेंट मिलता है। नियमों के मुताबिक यह रुटीन में होने वाली विभागीय प्रक्रिया है, लेकिन सीनियर सेकेंडरी शिक्षा निदेशालय में इसको लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। एसीपी के लिए अध्यापकों को मुख्यालय में चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
विभाग और सीएम विंडो पर सुनवाई नहीं तो पहुंचे मानवाधिकार आयोग
करनाल निवासी जसवंत रेढू ने बताया कि उनकी पत्नी उमा रेढ़ू निसिंग स्कूल में प्रिंसिपल थी। 20 अगस्त, 2019 को एसीपी के लिए डीईओ ऑफिस की ओर से फाइल मुख्यालय भेज दी गई। 6 माह तक मुख्यालय ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसी बीच, 20 फरवरी, 2020 को पत्नी का निधन हो गया। एसीपी केस के लिए निदेशक, सीएम विंडो समेत तमाम स्थानों पर शिकायज दर्ज कराई, लेकिन कहीं पर भी समाधान नहीं हुआ। बाद में मानवाधिकार आयोग के पास शिकायत की। आयोग के सदस्य दीप भाटिया ने डायरेक्टर सीनियर सेकेंडरी हरियाणा को पत्र भेज इस मामले में 6 सप्ताह में रिपोर्ट तलब की है। साथ ही ये भी माना है कि शिकायतकर्ता के मानवाधिकारों का हनन किया जा रहा है।
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जून में कुछ केस निकाले गए थे। उस समय 2000 केस बाकी रह गए थे। अब भी 1200 से अधिक केस लंबित हैं। इसके लिए एसोसिएशन कई बार निदेशक से मिलकर मांग कर चुकी है। अधिकारियों द्वारा बार-बार प्रोसेस बदलने से इसमें देरी हो रही है। विभाग को इसमें तेजी लानी चाहिए। - दयानंद दलाल, पूर्व प्रधान, हसला।
दिए जल्दी निपटाने के आदेश : शिक्षामंत्री
विभाग के अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि कर्मचारियों को समय पर एसीपी मिले। पहले एक ही ब्रांच ये काम करती थी, लेकिन अब संबंधित विषय की ब्रांच को ही ये काम दिया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही सभी लंबित मामले निपटा लिए जाएंगे। - कंवरपाल गुर्जर, शिक्षा मंत्री।
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