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पॉक्सो के पंजाब में 1112 मामले लंबित, न्याय के इंतजार में पीड़ित

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चंडीगढ़। बाल यौन शोषण को रोकने के लिए बने पॉक्सो एक्ट के बाद भी अपराधों में कमी नहीं आ पा रही है। इसकी एक बड़ी वजह यह भी मानी जा रही है कि पॉक्सो एक्ट में दर्ज मामलों में फैसले देरी से आ रहे हैं। पंजाब की यदि बात करें तो यहां अभी 1112 पॉक्सो के मामले लंबित पड़े हुए हैं। पड़ोसी राज्य हरियाणा में और भी हालात खराब हैं। यहां 2256 मामलों में पीड़ित न्याय का इंतजार कर रहे हैं।
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कानून मंत्रालय एवं न्याय विभाग की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राज्यों के साथ ही देश भर में बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में निरंतर वृद्धि हो रही है, जो चिंता का विषय है। तस्वीर का दूसरा पहलू इससे भी ज्यादा खतरनाक है क्योंकि बच्चों के प्रति यौन अपराधों की संख्या में काफी तेजी आई है। एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि न्याय मिलने में देरी का एक कारण यह भी है कि पॉक्सो के मामलों को निपटाने में तेजी नहीं आ पा रही है। बात चाहे राज्य की करें या फिर केंद्र शासित प्रदेश की हर जगह एक से सूरतेहाल है।
हालांकि पंजाब और हरियाणा राज्य में दूसरे राज्यों की अपेक्षा स्थिति काफी बेहतर है। आंकड़ों के अनुसार सबसे कम मामलों में उत्तराखंड 1,089 मामलों के साथ पहले नंबर पर है, जबकि 1,112 मामलों के साथ पंजाब दूसरे नंबर पर। झारखंड 1,987 मामलों के साथ तीसरे नंबर पर और हरियाणा 2,256 मामलों के साथ चौथे नंबर पर है।
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जल्द सरकार से करेंगे मुलाकात
नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी की चिल्ड्रेंस फाउंडेशन इस मामले में जल्द ही पंजाब सरकार के अधिकारियों से मुलाकात करेगी। साथ ही पंजाब में लंबित चल रहे पॉक्सो के मामलाें में तेजी लाने की अपील करेगा। इसके साथ ही कई जागरूकता कार्यक्रम भी राज्य में फाउंडेशन की ओर से शुरू किए जाएंगे।
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