पलवल। नूंह के जिला बाल कल्याण अधिकारी द्वारा की गई छेड़छाड़ मामले में मेंटर सुपरवाइजर न्याय पाने के लिए पिछले आठ माह से भटक रही है। लेकिन, अब तक उसे न्याय नहीं मिला है। इस मामले में उपायुक्त द्वारा अधिकारी को आरोपी तय करने के बाद नूंह पुलिस ने छेड़छाड़ और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया था। लेकिन, अब तक न तो उसे गिरफ्तार किया और न ही विभागीय कार्रवाई की गई है। थाना प्रभारी से लेकर डीएसपी, एसपी, पुलिस महानिरीक्षक तथा पुलिस महानिदेशक के अलावा विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री, गृहमंत्री तथा राज्यपाल तक से पीड़िता गुहार लगा चुकी है, फिर भी सुनवाई नहीं हुई। अब पीड़िता का कहना है कि यदि आरोपी बाल कल्याण अधिकारी को गिरफ्तार कर विभागीय कार्रवाई नहीं की गई तो वह अदालत जाएगी।
नूंह बाल कल्याण विभाग में कार्यरत पलवल निवासी पीड़िता मेंटर सुपरवाइजर का आरोप है कि नूंह में ही कार्यरत जिला बाल कल्याण अधिकारी उसके साथ छेड़छाड़ करता था। कई बार उसका विरोध किया, लेकिन उसने हरकत करनी बंद नहीं की। इसके बाद आरोपी जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ शोषण करता रहा। इसकी शिकायत उसने उपायुक्त और थाने में की थी। नूंह के तत्कालीन उपायुक्त द्वारा मामले की जांच की गई। जांच में उपायुक्त ने अधिकारी के खिलाफ आरोप तय कर दिए। इसके बाद 7 नवंबर 2020 को नूंह शहर थाने में अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया था। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी अधिकारी और पुलिस उस पर राजीनामा करने का दबाव बना रही है। पीड़िता का कहना है कि वह अपने साथ घटित घटना के सारे साक्ष्य पुलिस अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत कर चुकी है। हर जगह गुहार लगा चुकी है। अब केवल अदालत का सहारा बचा है। उसने मांग की है कि उसे इंसाफ दिलाया जाए तथा आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार किया जाए। इस बारे में जिला बाल कल्याण अधिकारी का कहना है कि उनके ऊपर लगे आरोप निराधार गलत हैं। उन्हें फंसाने का प्रयास किया जा रहा है।