- एक लाख, चार हजार हेक्टेयर में होती है जिले में रबी फसल की बुवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। जिले में पहले किसानों ने डीएपी की किल्लत झेली और अब किसानों को यूरिया खाद की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी दुकानों पर यूरिया खाद उपलब्ध नहीं होने के कारण किसान निजी दुकानों की तरफ रुख कर रहे हैं। किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर दुकानदार जमकर कालाबाजारी कर रहे हैं। यूरिया की किल्लत से परेशान किसानों द्वारा शुक्रवार को जब कृभको खाद केंद्र पर हंगामा किया गया तो वहां पुलिस बुलानी पड़ी।
निजी दुकानदार मनमाने दामों में किसानों को यूरिया खाद दे रहे हैं। किसानों को यूरिया खाद के साथ-साथ निजी दुकानदार जबरन कीटनाशक दवाइयां भी दे रहे हैं। किसानों को यूरिया के लिए मजबूर वश होकर दुकानदारों की बात माननी पड़ रही है। जबकि सरकारी दुकानों पर नैनो खाद देने का दबाव बनाया जा रहा है। पुलिस की निगरानी में यूरिया खाद वितरित किया गया। शुक्रवार सुबह नौ बजे ही किसान कृभको केंद्र पर यूरिया खाद लेने के लिए पहुंच गए। वहां लाइन लगा दी गई, लेकिन किसानों को यूरिया दोपहर तक नहीं मिला। इसपर किसानों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। किसानों को हंगामा करते देख खाद केंद्र पर पुलिस बुलानी पड़ी। पुलिस बुलाकर किसानों को समझाया गया तथा उनकी पर्ची देखकर यूरिया दिलवाया गया। किसानों में यूरिया की समस्या को लेकर रोष बना हुआ है।
एक लाख, पांच हजार हेक्टेयर में होती रबी की खेती
कृषि विभाग के अनुसार जिले में एक लाख, चार हजार हेक्टेयर में होती है। इसमें गेहूं की बुवाई 90 हजार हेक्टेयर में तथा सरसों की बुवाई पांच हजार हेक्टेयर में होती है। गन्ना की बुवाई भी पांच हजार हेक्टेयर होती है। उसके अलावा अन्य फसलों की बुवाई की जाती है। किसानों को फसल की बिजाई के समय डीएपी और बिजाई के बाद यूरिया की जरूरत पड़ती है। किसानों की फसल की बुवाई हो चुकी है और अब किसानों को यूरिया खाद की जरूरत पड़ रही है। किसान प्रति एकड़ पर तीन कट्टे यूरिया के डालते हैं। यूरिया खाद किसानों को नहीं मिल रहा है। यूरिया खाद की किल्लत से किसान मारे-मारे फिर रहे हैं। अब तो हालात ये हैं कि इफको खाद केंद्र पर महिला किसानों ने भी डेरा डालना शुरू कर दिया है।
इन स्थानों पर दुकानदार कर रहे मनमानी
जिले में गांव बामनीखेड़ा, रुंधी, दीघौट, रसूलपुर, चांट समेत अन्य स्थानों पर दुकानदार यूरिया खाद के साथ किसानों को जबरदस्ती कीटनाशक दवाइयां लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं। साथ ही यूरिया खाद की कालाबाजारी भी हो रही है। दुकानदार किसानों से मनमाने दाम वसूल रहे हैं।
मुझे करीब 3 घंटा हो गए लाइन में लगे हो गए हैं, लेकिन अब तक यूरिया खाद नहीं मिला है। यहां अधिकारियों के रिश्तेदारी व मित्र मिलने के बहाने आते हैं और लाइन से हटा देते हैं। प्रशासन को इंतजाम कराने चाहिए, ताकि किसानों को यूरिया खाद मिले।
- किसान महेश कैराका
मुझे तीन घंटे से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन अब तक यूरिया खाद नहीं मिला है। कभी आधार कार्ड के लिए तो कभी पर्ची के लिए धक्के खिला रहे हैं। प्रशासन का किसानों की तरफ कोई ध्यान नहीं है। किसान खाद के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं।
- किसान गिरिराज अलावलपुर
किसानों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। किसान पहले डीएपी खाद के लिए और अब यूरिया खाद के लिए भटकते फिर रहे हैं। किसानों को लाइन में लगे रहना पड़ता है। फिर उसके बाद उन्हें वापिस भेज दिया जाता है। शुक्रवार को भी इफको केंद्र पर किसानों के साथ यूरिया खाद को लेकर काफी बहस की गई। वहां मौके पर हंगामा भी हुआ, लेकिन यूरिया खाद देने के बजाय पुलिस बुलाकर किसानों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। इसे लेकर किसानों को एकत्रित कर आंदोलन किया जाएगा।
- राजीव लांबा, किसान नेता
जिले में खाद व यूरिया की कोई कमी नहीं है। किसानों को फसलों की बिजाई के लिए खाद व यूरिया उपलब्ध कराया जा रहा है। कहीं कोई दिक्कत है। कृभको केंद्र पर जो यूरिया व खाद बांटता है, उसके पिता का निधन होने से यह परेशानी हुई। बाद में इफको केंद्र से कर्मचारी बुलवाकर यूरिया बंटवाया गया। शुक्रवार को होडल में भी यूरिया का वितरण किया गया है। एक-दो दिन में और रैक आ जाएगा। किसानों को किसी तरह की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।
- डॉ. बाबूूलाल, उपनिदेशक कृषि विभाग