निर्माण के सालभर बाद भी चालू नहीं हुए तीन एमआरएफ सेंटर
अनूप पाराशर
पलवल। पलवल नगर परिषद ने वैज्ञानिक तरीके से कूड़ा निस्तारण करने के लिए आलापुर के पास तीन मैटीरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर बनाए थे। इसे बने करीब एक साल पूरे होने को है, लेकिन अब तक यहां पर कूड़ा निस्तारण नहीं किया गया है। नगर परिषद की लापरवाही और स्वच्छ भारत मिशन के अधिकारियों की अनदेखी के कारण सेंटर बनाने में खर्च लाखों रुपये पानी में बहते नजर आ रहे हैं। वहीं, अब सेंटरों में पानी और गंदगी का अंबार लग चुका है। फिर भी अधिकारी इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं।
क्या है एमआरएफ सेंटर
प्रदेश सरकार ने वैज्ञानिक तरीके से कूड़ा निस्तारण करने के लिए मैटीरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर योजना बनाई थी। इसके तहत कूड़े से पॉलीथिन, मेटल और पत्थर को अलग-अलग किया जाता है। इसके बाद इसे सड़क निर्माण करने वाली एजेंसियों को बेच दिया जाता है। पलवल स्थित आलापुर गांव में भी तीन एमआरएफ सेंटर स्थापित किए गए थे, ताकि शहर का कूड़ा अलग-अलग कर निस्तारित किया जा सके। लेकिन, अक्टूबर-2019 में निर्माण पूरा होने के बावजूद आज तक यहां पर कूड़ा निस्तारण की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। एक एमआरएफ सेंटर पर करीब 18 लाख रुपये की लागत आती है।
एमआरएफ सेंटरों को जल्द दुरुस्त कराया जाएगा। वहां जलभराव की समस्या को दूर कराकर जो कमियां हैं, उन्हें दूर कराया जाएगा। ताकि कूड़ा वहां पर अलग-अलग किया जा सके। शहर को स्वच्छ बनाना पहली प्राथमिकता है। स्वच्छता के प्रति लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है।
- मोनिका गुप्ता, नगर आयुक्त, पलवल
शहर को स्वच्छ रखने के लिए योजनाएं तो बहुत बनती हैं, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया जाता। ऐसा ही हाल जिले के एमआरएफ सेंटरों का है। आज तक सेंटरों पर कूड़ा अल-अलग नहीं किया गया। इस पर प्रशासन और नगर परिषद का कोई ध्यान नहीं है।
- नमिता तायल, अध्यक्षा क्लीन एंड स्मार्ट संस्था
परिषद की बोर्ड बैठकों में इस मुद्दे को उठाते रहे हैं, फिर भी नगर परिषद ने कुछ नहीं किया। अधिकारियों और चेयरपर्सन ने पिछले पांच सालों में जमकर भ्रष्टाचार किया है। काम पर कोई ध्यान नहीं है।
- रचना मावई, पार्षद पलवल