नगर पालिका में बिना टेंडर के पौने चार करोड़ रुपये के विकास कार्य कराए जाने के मामले में सीएम कार्यालय ने शिकायत की जांच कराने का फैसला लिया है। बृहस्पतिवार को इसकी जांच का काम एसडीएम सतेंद्र सिवाच ने शुरू कर दिया।
सिवाच ने अपने कार्यालय में नगर पालिका के सचिव सुनील रंगा, चेयरमैन राजबीर सिंह, शिकायतकर्ता व नगर पालिका के पूर्व वाइस चेयरमैन रामचंद्र तंवर, एमई, जेई व स्टाफ के साथ मामले से संबंधित पूरा रिकॉर्ड मंगाया। एसडीएम ने रिकॉर्ड की जांच शुरू करने के साथ ही संबंधित लोगों के बयान भी कलमबंद किए।
गौरतलब है कि इससे पहले इस मामले की जांच पूर्व एसडीएम जगनिवास एवं तत्कालीन डीसी अशोक मीणा कर चुके हैं। दोनों अधिकारियों ने अपनी जांच रिपोर्ट में अनियमितताएं होने की बात कही थी। जांच के दौरान कहा गया था कि चेयरमैन ने आपातकालीन शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए 3 करोड़ 75 लाख रुपये के विकास कार्य बिना किसी टेंडर के करा दिए। तत्कालीन डीसी ने जांच रिपोर्ट अर्बन लोकल बॉडिज के डायरेक्टर को भेज दी।
डायरेक्टर ने चेयरमैन राजबीर को इस संदर्भ में कारण बताओ नोटिस भी दिया था। इस मामले में शिकायतकर्ता रामचंद्र तंवर का कहना है कि जांच रिपोर्ट एवं कार्रवाई की फाइल एक ऑफिस सुपरीटेंडेंट ने मिलीभगत करके अपने पास रख ली तथा जांच रिपोर्ट को दबा दिया गया।
मामले की शिकायत 26 जुलाई, 2016 को तंवर ने सीएम विंडो पर की। अब सीएम विंडो द्वारा पुन: एसडीएम के माध्यम से जांच कराने के निर्देश दे दिए गए हैं। शिकायतकर्ता रामचंद्र तंवर का कहना है जिस मामले की जांच पहले ही उच्च अधिकारी कर चुके हैं, अब इसकी जांच नए सिरे से कराना यह साबित करता है कि चेयरमैन को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
उनका कहना है कि इस बीच नगर पालिका का ऑडिट भी हो चुका है। ऑडिट के दौरान भी यह अनियमितता सामने आनी चाहिए थी, परंतु इस मामले को दबा दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि पुरानी रिपोर्ट गलत है, तो अशोक मीणा के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।