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तेवतिया पाल के किसानों ने संभाली धरने की कमान, मुख्यमंत्री मनोहर लाल के बयान की निंदा की, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री को गिरफ्तार करने की मांग

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पलवल के अटोहां चौक पर धरना देते किसान। - फोटो : Palwal
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पलवल। नए कृषि कानूनों के विरोध में केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर चल रहा किसानों का धरना मंगलवार को भी जारी रहा। धरने में किसानों ने केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्र और आशीष कुमार मिश्र की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की। धरने की कमान तेवतिया पाल के किसानों ने संभाली। पाल की तरफ से गांव अलावलपुर, कटेसरा, जनौली, सदरपुर, गोपीखेड़ा व दूधौला के किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से धरनास्थल पर पहुंचे।
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धरने में किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि लखीमपुर खीरी में किसानों के साथ हुई वारदात से पूरे देश में रोष है। शांतिपूर्ण रूप से प्रदर्शन कर रहे किसानों को पीछे से गाड़ी से कुचल दिया गया, जिसका वीडियो भी वायरल हो रहा है। अंग्रेजी शासन काल के बाद में देश में पहली बार आंदोलनकारियों की आवाज को दबाने के लिए इस तरह की वारदात को अंजाम दिया गया है। सरकार दमनकारी नीतियां अपना रही है। विरोध करने वालों की हत्याएं करवाई जा रही हैं। किसानों के समर्थन में आने वाले विपक्षी दलों के नेताओं को नजरबंद करवा दिया गया। कई स्थानों पर नेताओं को हिरासत में लिया गया, जिससे पता चलता है कि किसानों की एकता से सरकार भय में है। वहीं, हरियाणा के मुख्यमंत्री किसानों के खिलाफ अनाप-सनाप बयानबाजी कर रहे हैं। किसान मुख्यमंत्री के बयान का कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। धरने की अध्यक्षता चौधरी मुंशीराम खुटैला ने किया, जबकि संचालन रूपराम तेवतिया ने किया। धरने को किसान नेता रतन सिंह सौरोत, किसान सभा के नेता धर्मचंद घुघेरा, स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती, बीधू सिंह, राजेंद्र बैंसला, नरेंद्र सहरावत, डिंगबर तेवतिया, विशंबर तेवतिया, राजेंद्र घर्रोट, समय सिंह डागर, गोपी हवलदार, चंदर जनौली, बसतीराम अलावालपुर, रमेश, चंद्रमुनि धतीर, इंद्र सिंह रावत ने संबोधित किया।
नेताओं ने निकाला कैंडल मार्च
लखीमपुर खीरी में हुए किसानों की मौत पर मंगलवार को किसान संघर्ष समिति के नेताओं ने कैंडल मार्च निकाला। किसान बस स्टैंड चौक पर एकत्रित हुए, जहां से कैंडल मार्च की शुरुआत की गई। मार्च रेलवे रोड होते हुए मीनार गेट चौक पहुंचा, जहां मार्च का समापन किया गया। इस दौरान किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी मांग की। किसानों ने कहा कि कृषि कानूनों के लिए चल रहे आंदोलन में हजारों किसानों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद किसानों को हौसले बुलंद है।
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