पलवल। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत हुए कार्यों में फर्जीवाड़े की जांच के लिए बुधवार को चंडीगढ़ से दोबारा टीम पलवल पहुंची। अब टीम चौथे चरण की जांच करेगी। बुधवार को टीम ने अधिकारियों से मुलाकात कर मामले की जानकारी ली। टीम में शामिल पंचायत विकास विभाग के उप निदेशक निर्मल नागर, सिस्टम एनालिस्ट संदीप वाही आदि ने एडीसी उत्तम सिंह से जांच के बारे में जानकारी मांगी। एडीसी उत्तम सिंह के नेतृत्व में गठित कमेटी भी घोटाले की जांच कर रही है। मनरेगा लोकपाल पंकज शर्मा अलग से जांच कर रहे हैं।
दरअसल, कोरोना काल के दौरान 2020-21 में जिले के अंदर मनरेगा के तहत हुए कार्यों में फर्जीवाड़ा सामने आया था। जिला परिषद सीओ ने घोटाले को उजागर किया था। मामले में जांच की गई तो घोटाले की पुष्टि हुई। दूसरी जांच मनरेगा लोकपाल द्वारा की गई। लोकपाल द्वारा जांच करने पर चौंकाने वाले खुलासे हुए। एक-एक रास्ते में दो-दो बार मिट्टी डाली दिखाई गई, लेकिन मौके पर कोई काम नहीं पाया गया।ा
लोकपाल की ओर से की गई जांच के दौरान गांव नांगल ब्राह्मण और हुडीथल के कार्यों को लेकर पूर्व सरपंचों सहित 13 अधिकारियों पर एक-एक हजार रुपये का जुर्माना कर रिकवरी करने के निर्देश जारी हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने मामले का संज्ञान लेकर चंडीगढ़ में टीम गठित की, जो जांच के लिए पलवल पहुंची। टीम ने भी जांच में फर्जीवाड़ा पाया। अब मामले का संज्ञान लेते हुए पंचायत एवं विकास मंत्री देवेंद्र बबली ने चौथे चरण की जांच शुरू कराई है। बुधवार को टीम पलवल पहुंच गई है। टीम अगले दो-तीन दिन तक मनरेगा कार्यों की गांव-गांव जाकर जांच करेगी।