पलवल। बृहस्पतिवार को आए स्वच्छता सर्वेक्षण में पलवल की रैंकिंग में कोई सुधार नहीं हुआ है। इस बार भी देशभर में जहां 266 वें स्थान पर रहा है, वहीं हरियाणा में 13वें स्थान पर आया है। सवा करोड़ रुपये महीना सफाई पर खर्च करने के बावजूद स्वच्छता सर्वेक्षण में इतने नीचे पायदान पर पहुंचना पलवल जिला प्रशासन और नगर परिषद की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है। स्वच्छता सर्वेक्षण में एक बार फिर पिछड़ने पर लोगों ने भी पलवल प्रशासन और नगर परिषद के कामकाज पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। पलवल वर्ष 2018 में 246 वें स्थान पर रहा था। जबकि 2019 में 283वें स्थान पर आया था। 2020 में 357 वें स्थान पर तथा 2021 में 342 तथा 2022 में फिर 295वें स्थान पर आया था। अब 2023 के सर्वेक्षण में 266वें स्थान पर आया है। इसी तरह से हरियाणा प्रदेश में भी सर्वेक्षण में कोई सुधार नहीं हुआ है।
कूड़ा निस्तारण में जीरो अंक ने खडे़ किए सवाल
इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण में सबसे शरमनाक स्थिति कूड़ा निस्तारण के मामले में देखने को मिली है। कूड़ा निस्तारण करने के मामले में सर्वेक्षण में जीरो अंक मिलना बहुत ही दयनीय स्थिति है। यह हाल तो तब है, जब नगर परिषद द्वारा पलवल में करीब 90 लाख रुपये खर्च पलवल के गांव फिरोजपुर और आलापुर में कूड़ा निस्तारण के तीन केंद्र बनाए हुए हैं। उसके बावजूद जीरो नंबर आना सवाल पैदा करता है। हालांकि कूड़े को अलग-अलग करने में 8 अंक मिले हैं। घर-घर से कूड़ा उठाने में 86 अंक मिले हैं।
नगर परिषद का दावा 70 लाख सफाई पर खर्च
नगर परिषद के दावों पर नजर दौड़ाई जाए तो पलवल शहर की सफाई व्यवस्था पर हर महीने 70 लाख का खर्च किया जा रहा है उसके बावजूद रैंकिंग में ज्यादा सुधार नहीं हो रहा। नगर परिषद की तरफ से यह दावे किए जाते रहे हैं कि घर-घर कूड़ा उठाया जाने की व्यवस्था पहले से बेहतर की गई है, सफाई कर्मचारी नियमित रूप से नाले-नालियों की सफाई करते रहते हैं। मगर व्यवस्था बेहतर होती तो पलवल फिसड्डी साबित न होता।
जगह-जगह कूड़े के ढेर
शहर में कुछ इलाकों में कूड़ेदान की व्यवस्था तो है, लेकिन उसका प्रयोग न के बराबर हो रहा है। लोगों का कहना है कि कई-कई दिन तक सड़कों और गलियों में कूड़ा पड़ा सड़ता रहता है। यही कूड़ा नालियों में चला जाता है, जिसका परिणाम जलभराव के रूप में देखने को मिलता है।
डोट-टू-डोर अभियान नाकाफी
डोर-टू-डोर कूड़ा उठान में भी नपा के सफाईकर्मी भी सुस्त साबित हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि कूड़ा उठाने वाली गाड़ी कभी-कभी ही आती है और आती भी है तो समय पर नहीं आती है। नगर परिषद के सफाई व्यवस्था के दावों की पोल नालियों में जमा कूड़ा खोलता नजर आता है शहर के सभी नाले तथा नालियां जाम रहती है नालों में भरी पड़ी पॉलिथीन कई कई दिन तक उठाई नहीं जाती है। नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन अनिल गोयल, केशव देव मुंजाल, महेंद्र चुघ का कहना है कि यह बेहद शर्मनाक है। करोड़ रुपये खर्च के बावजूद यह स्थिति बेहद खराब है।