पलवल। गिरते भू-जल स्तर को सुधारने व पानी के स्रोत बचाए रखने के उद्देश्य से मेरा पानी-मेरी विरासत स्कीम चलाई शुरू की गई है। कृषि विभाग द्वारा शुरू की गई स्कीम के तहत बीते साल धान बोने वाले किसानों को अन्य फसल बोने पर सात हजार रुपये प्रति एकड़ दिए जाएंगे। किसान अपना खेत खाली छोड़ कर भी लाभ ले सकते हैं। इसके लिए किसान को मेरी फसल-मेरा ब्योरा के पोर्टल पर 25 जून तक पंजीकरण कराना होगा। जिले में धान बुआई के रकबे को घटाने में योगदान देने वाले किसानों को लाभार्थियों में शामिल किया जाएगा। धान की जगह बाजरा बोने पर योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
जिला उपायुक्त नरेश नरवाल ने बताया कि पलवल में करीब 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की बिजाई की जाती है। जिले का जलस्तर निरंतर गिरता जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुमान के अनुसार एक किलो धान पैदा करने के लिए करीब चार हजार लीटर पानी की आवश्यकता रहती है। इस कारण धान की फसल में ज्यादा पानी खर्च होता है और भू-जल स्तर गिरता है, जोकि चिंता का विषय है। हरियाणा सरकार द्वारा गिरते भू-जल स्तर को रोकने और किसानों को दूसरी फसलों के प्रति प्रोत्साहित करने हेतु मेरा पानी-मेरी विरासत स्कीम चलाई गई है। स्कीम के तहत गत वर्ष के धान के खेतों में अन्य फसलें जैसे मक्का, कपास, तिलहन, दालें, चारा वाली फसलें, बागवानी की फसलें, सब्जियां उगाने या फिर खेत खाली रखने पर प्रति एकड़ सात हजार रुपये का अनुदान देने का प्रावधान किया है।
योजना का लाभ पाने के लिए किसान अपने क्षेत्र के खंड कृषि अधिकारी कार्यालय में संपर्क कर मेरा पानी-मेरी विरासत स्कीम के तहत अपना पंजीकरण करवाएं। पोर्टल पर किसान अपना पंजीकरण अवश्य करवाएं। इसके लिए किसानों को परिवार पहचान पत्र, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, बैंक की पासबुक, फरद व फसल के कीले नंबर की जानकारी उपलब्ध करवानी होगी।