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छह कर्मचारियों ने जमा करवाए लैपटॉप, मनरेगा में घोटाला करने का मामला, तेज हुई जांच

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पलवल। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में हुए घोटाले की जांच तेज कर दी गई है। योजना में व्याप्त अनियमितताओं की जांच के तहत मांगा रिकॉर्ड रिकवर किया जा रहा है। सामूहिक तौर पर स्वेच्छा से 12 मार्च को इस्तीफा देने वाले आठ कर्मचारियों में से छह ने लैपटॉप और डोंगल जमा करवा दिए हैं। लैपटॉप डीआरडीए में कार्यरत कंप्यूटर आपरेटर सुनील कुमार द्वारा खंड विकास एवं पंचायत कार्यालय में जमा करवाए गए हैं। इन कर्मचारियों द्वारा दस्तावेज जमा नहीं करवाने पर सीईओ जिला परिषद प्रशांत कुमार ने एफआईआर दर्ज करवाने की बात कही थी।
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रिकॉर्ड जमा होने के साथ ही व्यापक स्तर पर जांच के लिए आदेश जारी किए गए हैं। लोकपाल पंकज शर्मा और उनकी टीम रिकॉर्ड के आधार पर गांव-गांव जाकर विकास कार्यों की जांच करेगी। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी भी जांच करेंगे। अगले दो सप्ताह के अंदर जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। अब तक रिकॉर्ड नहीं मिलने से मनरेगा की जांच पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाई थी। लोकपाल पंकज शर्मा ने कहा क नियमानुसार इस्तीफा देने से पहले रिकॉर्ड जमा करवाया जाना चाहिए था। इस्तीफा देने से जुर्म कम नहीं होता है और न ही कानूनी कार्रवाई रोकी जा सकती है। मनरेगा में पिछले दो साल में करीब 50 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है। कोरोना काल में भी मिट्टी डालने के नाम पर 26 करोड़ रुपये निकाल लिए गए। इस साल भी करीब 26 करोड़ रुपये के विकास कार्य कागजों में दर्शा कर इतनी ही धनराशि सरकारी खजाने से निकाली गई।
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