पलवल। शहर में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। जहां सोमवार को पीएम-10 का स्तर 249 था, वहीं मंगलवार को यह बढ़कर 460 पर पहुंच गया। पीएम-2.5 का स्तर सोमवार को अधिकतम 359 पर था, जो मंगलवार को बढ़कर 500 पर पहुंच गया। लगातार बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने के लिए इंतजाम नहीं किए गए तो पलवल शहर भी एनसीआर के अन्य शहरों की तरह प्रदूषित शहरों में शामिल हो जाएगा।
पराली नहीं जलाएं, कूड़ा नहीं जलाने के लिए कृषि विभाग और प्रशासन किसानों और आम लोगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। यही कारण है कि जिले में किसानों द्वारा पराली जलाई जा रही है। लोग और सफाई कर्मचारी भी कूड़ा जला देते हैं। जिसके चलते पलवल में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। बाहर निकलते ही स्मॉग दिखाई देने लगता है। दो दिन में ही पराली, कूड़ा और दिवाली व गोवर्धन पर हुई आतिशबाजी ने प्रदूषण के स्तर को खतरे के निशान पर ला दिया है। यदि समय रहते लोगों ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया तो प्रदूषण कम होने के बजाय और भी अधिक बढ़ जाएगा।
विभाग द्वारा किसानों को रोजाना खेतों में जाकर जागरूक किया जा रहा है कि वे पराली नहीं जलाएं। उन्हें पराली जलाने से होने वाले नुकसान और प्रदूषण स्तर के बढ़ने से होने वाले दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी जा रही है। कोशिश की जा रही है कि खेतों में किसान पराली नहीं जलाएं। कृषि विकास अधिकारी डा. महावीर मलिक
नगर परिषद अध्यक्षा इंदू भारद्वाज का कहना है कि नगर परिषद के सफाई निरीक्षक के आदेश दिए गए हैं कि वे रोजाना सुबह और शाम को शहर का चक्कर लगाएं ओर कूड़ा जलाने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करें। इसके अलावा उनसे मौके पर ही जुर्माना वसूला जाए, ताकि और लोगों द्वारा कूड़ा नहीं जलाया जाए।