पलवल। मुंबई रेलवे फ्रेट कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण मामले में हुई धांधली में नई परतें खुलने लगी हैं। इस मामले में रिकॉर्ड के मुताबिक पृथला व मैदापुर के ऐसे सैकड़ों लोगों ने पांच लाख रुपये के लिए आवेदन किया है, जिनकी अधिगृहीत जमीन का रकबा एक गज से भी कम है। गांव मैदापुर के कुल 136 लोगों के अवार्ड हुए हैं, जिनमें से 109 ने अवार्ड से पूर्व ही रजिस्ट्री कराई है। वहीं गांव पृथला के 219 अवार्ड में से ऐसी रजिस्ट्रियों की संख्या 125 के करीब है।
यूपी के दादरी से नवी मुंबई से रेलवे कॉरिडोर का काम चल रहा है। यह कॉरिडोर फरीदाबाद से पलवल, सोहना, रेवाड़ी, नारनौल होता हुआ राजस्थान की सीमा में प्रवेश करेगा। कॉरिडोर के लिए जिला के असावटी, जटौला, पृथला, मैदापुर, छपरौला, टहरकी, दहलाका सहित अन्य गांवों की जमीन अधिगृहीत की गई। रेलवे की पॉलिसी के अनुसार जिस किसान की जमीन अधिग्रहण किया जाता है, उसके परिवार के एक सदस्य को नौकरी या रोजगार के लिए पांच लाख रुपये अतिरिक्त मुआवजा दिया जाता है। अधिकारियों व कर्मचारियों को इस बात का पता चलने पर जमीन की खरीद फरोख्त शुरू हो गई। बीते साल एसडीएम ने चार गांव का अवार्ड भी घोषित कर दिया। इससे पहले एसडीएम कार्यालय के कर्मचारियों व पटवारियों ने छोटे-छोटे टुकड़ों में जमीन खरीदकर सैकड़ों लोगों को बेच दी।
एसडीएम कार्यालय द्वारा सुनाए गए अवार्ड के अनुसार गांव मैदापुर में कुल 136 लोगों की जमीन अधिगृहीत हुई। इनमें 109 लोग ऐसे हैं, जिनकी एक गज से भी कम जमीन अधिग्रहण में आई है। 27 लोग जमीन के पुराने मालिक हैं। इसी प्रकार गांव पृथला के 219 लोगों में करीब 125 लोगों की जमीन एक गज से भी कम है। एक पटवारी ने गांव मैदापुर में जमीन खरीद कर सात गज जमीन को 40 लोगों, 15 गज जमीन को 42 लोगों व 30 गज जमीन को करीब 50 लोगों के बेच दिया। अब इन सभी लोगों ने पांच लाख रुपये व सरकारी नौकरी की यह कहते हुए मांग की है कि उनकी सारी जमीन रेलवे कॉरिडोर में चली गई है।