आजाद हिंद फौज का गठन कर आजादी की लड़ाई को धार देने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस का पलवल से गहरा नाता रहा है। उन्होंने गांधी जयंती पर दो अक्तूबर 1938 को शहर में गांधी आश्रम की स्थापना की थी। लोग आज भी उनके द्वारा बनाई गई कोठरी को देखने के लिए गांधी आश्रम आते हैं। आश्रम का निर्माण गांधीजी की पलवल में हुई गिरफ्तारी की याद को चिरस्थायी बनाए रखने के लिए किया गया था।
10 अप्रैल 1919 को पलवल में हुई महात्मा गांधी की गिरफ्तारी की यादों को स्थायी रूप से संजोने के लिए तब गांधी सेवाश्रम का निर्माण करने का निर्णय लिया गया था। इसके लिए यहां के सिंगला परिवार ने भूमि दान में दी थी और नेताजी से आश्रम के निर्माण की आधारशिला रखवाई गई थी। नेताजी ऊंची गर्दन वाले सफेद घोड़े पर सवार होकर पलवल आए थे। आधारशिला रखने के बाद उन्होंने पुराने सरकारी अस्पताल के पास सभा को संबोधित करते हुए युवाओं को आजादी के आंदोलन में कूदने का आह्वान भी किया था।
कपड़ों के थान बिछाए थे
स्वतंत्रता सेनानियों के परिजन उदयभान सिंगला व एसपी मित्तल बताते हैं कि जब नेताजी का जुलूस बाजारों से गुजरा तो व्यापारियों ने उनके स्वागत में दुकानों से नए कपड़ों के थान जमीन पर बिछा दिए थे। स्वाधीनता सेनानी व उनके साथ छोटे-छोटे बच्चों का जुलूस तिरंगा थामे महात्मा गांधी, भारत मां व नेताजी जिंदाबाद के नारे लगाते हुए चल रहे थे। औरतें घूंघट की ओट से नेताजी की एक झलक पाने के लिए बेताब थीं।
यादें संजों रखी हैं
गांधी आश्रम में नेताजी सुभाषचंद बोस की कोठरी को पूरी तरह से संजों कर रखा गया है। आश्रम में बनी कोठरी, जिसकी पहली ईंट नेताजी ने अपने हाथों से रखी थी उसे आज भी लोग देखने आते हैं।
-देवीचरण मंगला, अध्यक्ष, गांधी आश्रम।