संवाद न्यूज एजेंसी
अंतरराष्ट्रीय मातृ दिवस पर सामाजिक कार्यकर्ता आचार्य राजेश ने कहा कि माता केवल परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के संस्कारों की आधारशिला होती है। भारतीय संस्कृति में माता को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि आज आधुनिकता और भौतिकता की दौड़ में कुछ लोग माता-पिता को वृद्धाश्रम में छोड़ देते हैं, जो सामाजिक और मानवीय मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि माता-पिता बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए संपूर्ण जीवन समर्पित कर देते हैं, इसलिए उनकी सेवा और सम्मान प्रत्येक संतान का नैतिक दायित्व है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने परिवारों में प्रेम, संस्कार और सम्मान की परंपरा को बनाए रखें तथा माताओं के प्रति आदर और कृतज्ञता की भावना विकसित करें। उन्होंने कहा कि जिस समाज में माताओं का सम्मान होता है, वही समाज उन्नति, सुख-शांति और समृद्धि की ओर अग्रसर होता है।