- जानकारी के अभाव में आयुष्मान कार्ड बनवाने नहीं पहुंच रहे बुजुर्ग
- 23 सरकारी व 14 निजी अस्पताल के जरिये उठा रहे स्वास्थ्य सुविधाओं का फायदा
- अभी तक करीब 40 करोड़ रुपये जारी कर चुका है स्वास्थ्य विभाग
प्रवीण बैंसला
पलवल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से साल 2018 में शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना का लाभ जिले के अधिकांश बुजुर्गों को नहीं मिल पा रहा है। अभी तक जिले में करीब 840 बुजुर्गों के ही आयुष्मान वय वंदना कार्ड बन पाए हैं, जबकि जिले में 70 साल उम्र से ऊपर बुजुर्गों की संख्या 15 हजार से अधिक है। जानकारी के अभाव में बुजुर्ग इस योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बुुजुर्गों को जागरूक करने के लिए कोई खास अभियान अभी तक नहीं चलाया है। कार्ड न होने से बुजुर्ग निजी तौर पर उपचार कराने को मजबूर हैं। वहीं, कुछ कार्ड धारकों का आरोप है कि निजी अस्पताल आयुष्मान के तहत उपचार करने से मना कर देता है। हालांकि विभाग द्वारा जिले में लाभार्थियों के उपचार पर करीब 40 करोड़ की राशि खर्च करने का दावा किया जा रहा है। 38 हजार से ज्यादा लोगों का आयुष्मान योजना के तहत उपचार कराया गया है।
दरअसल, साल 2018 में आयुष्मान भारत योजना शुरू की गई। बाद में इसका नाम बदलकर पीएम जन आरोग्य योजना कर दिया गया। पहले इस योजना में 70 लाख से ऊपर के लोगों को योजना में शामिल नहीं जाता था, परंतु बाद में बुजुर्गों को भी शामिल किया जाने लगा। अभी 70 साल से ऊपर बुजुर्गों के आयुष्मान वय वंदना कार्ड बनाए जा रहे हैं। इन कार्डों को बनाने के लिए कोई पैमाना तय नहीं किया गया। 70 साल की उम्र पूरी होते ही बुजुर्ग अपना वंदना कार्ड बनवा सकता है। इसके लिए कोई आवेदन करने की भी जरूरत नहीं है। बुजुर्ग सीधे जिला नागरिक अस्पताल स्थित आयुष्मान खिड़की पर जाकर आधार कार्ड दिखाकर वंदना कार्ड बनवा सकता है। बुजुर्ग को तुरंत प्रभाव से कार्ड जारी किए जाने का प्रावधान है, परंतु जिले में बुजुर्गों को इस योजना की जानकारी ही नहीं है। अभी तक जिले में के 840 बुजुर्ग ही अस्पताल में कार्ड बनवाने पहुंचे हैं, जबकि जिले में 70 साल से ऊपर बुजुर्गों की संख्या 15 हजार से अधिक बताई जा रही है।
72 प्रतिशत लाभार्थियों के बन चुके हैं कार्ड
जिला स्वास्थ्य विभाग के अनुसार साल 2011 में हुए सर्वे के अनुसार 1.07 लाखों को आयुष्मान योजना के चयनित किया गया। साल 2022 में चिरायु हरियाणा के तहत 5.99 लाख लोगों का चयन किया गया। फिलहाल जिले में 7.07 लोगों को आयुष्मान व चिरायु योजना में शामिल किया गया। जिले में अभी तक 3.98 लाख लोगों के गोल्डन कार्ड बनाए जा चुके हैं। कुल मिलाकर 5.12 लाख लोगों के कार्ड जारी हो चुके हैं। अभी तक विभाग की ओर से 72 प्रतिशत लोगों के कार्ड जारी किए जा चुके हैं, अन्य की प्रक्रिया जारी है।
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पैनल में शामिल हैं 14 निजी व 23 सरकारी अस्पताल
जिले में जिला नागरिक अस्पताल, सब डिविजनल अस्पताल होडल, सब डिविजनल अस्पताल हथीन, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुधौला, अलावलपुर, औरंगाबाद व सौंदहद के अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पैनल में शामिल हैं। निजी अस्पतालों में गुरुनानक अस्पताल, पलवल हॉस्पीटल, गोल्डन अस्पताल, गोयल नर्सिंग होम, श्री साईं अस्पताल, राहुल नर्सिंग होम, सचिन अस्पताल, कॉसमॉस अस्पताल, प्रभा आई अस्पताल, श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल, मनोज हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर, तुला हॉस्पीटल, गैलेक्सी हॉस्पिटल व एटलस हॉस्पिटल शामिल हैं।
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40 करोड़ रुपये जारी कर चुका है विभाग
विभाग के अनुसार 14,903 लोगों का उपचार सरकारी अस्पतालों में हुआ है, जिन पर 5.21 लाख रुपये खर्च हुए हैं, जबकि निजी अस्पताल में 23,679 लोगों का उपचार हुआ है, जिन पर 34.57 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। अभी तक कुल 38,582 लोगों का उपचार योजना के तहत हो चुका है, जिन पर 39.78 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।
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इन बीमारियों का करा सकते हैं उपचार
आयुष्मान भारत योजना के तहत सभी बड़ी बीमारियों का उपचार कराया जाता है। योजना में पांच लाख रुपये का इंश्योरेंस मिलता है। योजना के तहत कैंसर, हृदय रोग, किडनी से जुड़ी बीमारियां, कोरोना, मोतियाबिंद, डेंगू, चिकुनगुनिया, मलेरिया, घुटना और नी रिप्लेसमेंट जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज होता है। हालांकि, मोतियाबिंद, सर्जिकल डिलीवरी, और मलेरिया समेत कई बीमारियां का इलाज केवल सरकारी अस्पताल में होता है। कैंसर, डबल वॉल्व रिप्लेसमेंट, कोरोनरी आर्टरी बाइपास, पल्मोनरी वॉल्व रिप्लेसमेंट, नी और हिप रिप्लेसमेंट, स्कल बेस सर्जरी, टिश्यू एक्सपेंडर, पीडियाट्रिक सर्जरी, रेडिएशन ओंकोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, एंजियोप्लास्टी विद स्टेंट जैसी गंभीर बीमारी की सर्जरी निजी अस्पताल से कराई जा सकती है।
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मुझे आयुष्मान के तहत बुजुर्गों के इलाज योजना के बारे में जानकारी नहीं थी। मेरे माता-पिता अक्सर बीमार रहते हैं। मैं निजी तौर पर उपचार कराता रहा हूं। जल्द ही अस्पताल में जाकर अपने माता-पिता का कार्ड बनवाऊंगा। - उपकार सिंह, छज्जूनगर
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मैं ज्यादातर बीमार रहती हूं। इलाज कराने के लिए बच्चों पर निर्भर रहना पड़ता है। यदि सरकार पांच लाख तक का निशुल्क उपचार करा रही है तो मैं जल्द ही अपना कार्ड बनवाने के लिए अस्पताल जाऊंगी। - रमेश देवी, बाता
चिरायु योजना के तहत निरंतर कार्ड बनाए जा रहे हैं। 70 साल से ऊपर बुजुर्गों के आयुष्मान वय वंदना कार्ड बनाए जा रहे हैं। बुजुर्ग सीधे अस्पताल आकर कार्ड बना सकते हैं। जल्द ही बुजुर्गों को कार्ड बनवाने के लिए जागरूक किया जाएगा। - डॉ. जय भगवान जाटान, जिला सिविल सर्जन, पलवल