बेटी अभी छत पर मत जा, वहां बंदरों के झुंड खडे़ हुए हैं। बेटा रास्ते में देख कर जाना, कहीं बंदर हमला न कर दें। इस प्रकार के वाक्य कॉलोनियों में रहने वाली महिलाओं अकसर अपने बच्चों से कहते हुए दिख जाएंगी। शहर की अधिकांश कॉलोनियों में रहने वाले नागरिक बंदरों के आतंक से बेहद परेशान हैं। बंदरों द्वारा कालोनियों में मचाए जा रहे आतंक के बारे में कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को मौखिक व लिखित शिकायत देकर अवगत कराया जा चुका है लेकिन प्रशासन द्वारा उक्त मामले को गंभीरता से न लेने के कारण लोगों में प्रशासन के प्रति रोष है।
झुंड बनाकर आने वाले बंदरों से लोग दहशत में हैं। यह बंदर घरों में लगी डिश की केबल काट देते हैं। सूखते कपड़ों को फाड़ देते हैं। बिजली के तार पर झूलते रहते हैं। यह उत्पाती बंदर घर की छतों पर रखी पानी की टंकी का ढक्कन तोड़कर पानी पीकर उसी में डुबकी लगाते हुए देखे जा सकते हैं।
अधिकांश कालोनियों में बंदरों का इतना खौफ है कि मौका मिलते ही घरों में घुसकर उत्पात मचाने लगते हैं और फ्रिज में रखी खाने-पीने की चीजें लेकर भाग जाते हैं। शहर की ताली मंडी, रेलवे रोड कॉलोनी, श्याम कॉलोनी, सब्जी मंडी, प्रिन्स कॉलोनी, आदर्श कॉलोनी में रहने वाले बच्चे व महिलाएं बंदरों के आतंक का शिकार होकर गंभीर रूप से घायल भी हो चुके हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि उत्पाती बंदरों को पकड़वाकर उचित स्थान पर छुड़वाया जाए। जिससे शहरवासियों को इनके आतंक से छुटकारा मिल सके।