पलवल। जिला बनने के 12 साल बाद भी पलवल में श्रम अदालत स्थापित नहीं की जा सकी है। जिले में सभी अदालतें हैं, लेकिन श्रम अदालत न होने के कारण वकीलों और श्रमिकों को अपने मुकदमों के लिए फरीदाबाद जाना पड़ता है। इससे उनका समय व पैसा दोनों बरबाद होते हैं। पलवल में श्रमिक अदालत खुलने की मांग जिला बनने के बाद से ही चली आ रही है। कई बार जिला बार द्वारा इसके लिए श्रम मंत्रालय तथा सरकार को पत्र भी लिख चुके हैं, लेकिन आज तक इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
जिले में पृथला व हथीन औद्योगिक क्षेत्र हैं। इन क्षेेत्रों में खासकर पृथला विधानसभा के क्षेत्र के गांव दूधौला में दर्जनों कंपनियां हैं। इसके अलावा ततारपुर, बघौला, पृथला, पलवल से आगे औरंगाबाद, श्रीनगर तथा हथीन क्षेत्र में कंपनियां स्थापित हैं। इन कंपनियों के अलावा स्कूल, अस्पताल, नगर परिषदों तथा अन्य संस्थाओं में में एक लाख से अधिक श्रमिक काम करते हैं। जहां अक्सर श्रमिकों व प्रबंधकों में विवाद चलता रहता है। ऐसे में श्रम अदालतों में मुकदमा दायर होने के बाद श्रमिकों व उनके वकीलों को फरीदाबाद भटकना पड़ता है।
श्रम निरीक्षक व समझौता अधिकारी बैठते हैं पलवल में
जिले में इस समय श्रम निरीक्षक व समझौता अधिकारी तो बैठते हैं, लेकिन उनसे विवाद न निपटने के बाद मजदूरों को प्रबंधकों के खिलाफ श्रमिक न्यायलय का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में पलवल में श्रम न्यायालय न होने के कारण उन्हें फरीदाबाद जाना पड़ता है। पलवल से फरीदाबाद करीब 35 किलोमीटर दूरी पर है। ऐसे में समय तो खराब होता ही है साथ ही पैसा भी लगता है।
श्रम न्यायालय में तीन पीठासीन अधिकारी बैठते हैं
फरीदाबाद स्थित श्रम न्यायालय में अलग-अलग अदालतों में तीन पीठासीन अधिकारी बैठते हैं। पलवल में श्रम निरीक्षक व समझौता अधिकारी से विवाद न निपटने के बाद शिकायत का डिमांड नोटिस चंडीगढ़ स्थित श्रम आयुक्त के पास भेजा जाता है। वहां से श्रम आयुक्त के पास से मामला श्रम अदालत में भेजा जाता है। उसके बाद श्रम अदालत में श्रमिक खुद तथा उसका वकील पैरवी करता है। अदालत में श्रमिकों संगठनों के नेता भी पैरवी कर सकते हैं।
पलवल जिले में श्रमिक अदालत खुलनी चाहिए। इसके लिए श्रमिक संगठनों द्वारा जिला बनने के बाद से ही मांग की जा रही है। श्रमिकों का प्रबंधकों से विवाद होने के बाद उन्हें फरीदाबाद जाना पड़ता है। जिससे उन्हें काफी परेशानी होती है। फरीदाबाद के वकील ज्यादा फीस लेते हैं। ऐसे में भी श्रमिकों को नुकसान होता है। पलवल में श्रमिक अदालत खुलनी चाहिए।
- श्रीपाल भाटी, जिलाध्यक्ष सीआइटीयू (सेंट्रल आफ इंडियन ट्रेड यूनियन)
पलवल में श्रम अदालत की मांग पलवल के 2008 में जिला बनने के बाद से लगातार की जा रही है। मैंने जिला बार एसोसिएशन का अध्यक्ष रहते हुए भी श्रम मंत्रालय तथा सरकार को कई बार पत्र लिखकर भी मांग की थी। सीएम विंडो पर भी मांग की हुई है। जल्द ही इस मांग को लेकर पलवल के वकीलों द्वारा श्रमिकों के साथ मिलकर एक अभियान भी चलाया जाएगा।
- सुभाष शर्मा, पूर्व अध्यक्ष जिला बार एसोसिएशन पलवल
वकीलों व कुछ श्रमिक संगठनों द्वारा मुझसे मिलकर इस बात की मांग रखी थी कि पलवल में श्रमिक अदालत खुलवाई जाए। मैँने श्रमिकों की इस समस्या से मुख्यमंत्री को अवगत कराया हुआ है। इसके साथ ही कानून मंत्री तथा श्रम मंत्रालय में भी मैं लगातार इसके लिए प्रयासरत हूं। मेरा प्रयास है कि पलवल जिले में जल्द से जल्द श्रम अदालत खुले।
- दीपक मंगला, विधायक पलवल