जिला प्रशासन द्वारा गांवों व कस्बों में खोले जा रहे कौशल विकास केंद्र स्वरोजगार व रोजगार के क्षेत्र में महिलाओं को नई दिशा दिखा रहे हैं। गांव बघौला में प्रयोग के तौर पर खोले गए केंद्र से 80 महिलाओं को रोजगार मिला है, वहीं सात ने बैंकों के सहयोग से लोन लेकर स्वरोजगार को अपनाया है।
जिला प्रशासन ने प्रयोग के तौर पर फरवरी 2016 में गांव बघोला में केंद्र की शुरूआत की थी। योजना की कामयाबी से उत्साहित जिला प्रशासन 11 गांवों में केंद्रों की स्थापना कर चुका है व मार्च 2017 तक 50 केंद्र बनाए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। औद्योगिक इकाइयों के सहयोग से खोले जाने वाले केंद्रों में महिलाओं व लड़कियों को मुफ्त में प्रशिक्षण दिया जाता है।
केंद्रों में आसपास के गांवों की महिलाओं व युवतियों को पंजीकृत किया जाता है। बाल विकास व कल्याण विभाग के संयोजन में खोले जाने वाले केंद्र को संबंधित गांव पंचायत की संस्तुति पर खोला जाता है। इसके लिए ग्राम पंचायत द्वारा स्थान उपलब्ध कराए जाने पर औद्योगिक इकाई के सहयोग से विशेषज्ञ की देखरेख में कौशल कला का ज्ञान दिया जाता है।
जिला प्रशासन द्वारा अभी तक 11 गांवों में केंद्रों की स्थापना की जा चुकी है। जिनमें से गांव अल्लीका में 52, चांदहट में 34 जनाचौली में 36, रोनीजा में 30 व कलवाका में 36 ने पंजीकरण कराया है, जिन्हें प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है। इसके अलावा दीघोट, खेड़ला, बामनीखेड़ा, खेड़ला व नांगलजाट में पंजीकरण का कार्य अभी चल रहा है। हसनपुर के मांओमवती कॉलेज में भी एक केंद्र चलाया जा रहा है, जिसे कॉलेज प्रबंधन द्वारा चलाया जा रहा है। जवाहर नगर कैंप में शीघ्र ही रैडक्रास की देखरेख में क्लासिकल म्यूजिक व डांस के लिए केंद्र की स्थापना करने की योजना पर भी कार्य चल रहा है। इसके साथ-साथ होडल, हथीन, रींडका व कुसलीपुर सहित कुल 50 केंद्र खोलने का लक्ष्य रखा गया है।
महिला रोजगार की दिशा में कौशल विकास केंद्र मील का पत्थर साबित होने वाले हैं। इन केंद्रों से संभवत: प्रतिवर्ष 500 से अधिक महिलाओं को प्रतिवर्ष रोजगार मिल सकता है। मार्च 2017 तक कुल 50 केंद्र बनाए जाने की योजना है, जिस पर कार्य किया जा रहा है।
-अशोक शर्मा, डीसी, पलवल।