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मोबाइल पर दिए तलाक  के मामले में बढ़ा असमंजस 

Fri, 30 Dec 2016 04:16 PM IST
palwal
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मोबाइल पर दिए गए तलाक के मामले में उटावड़ गांव में हुई मुस्लिम मेव महापंचायत ने फैसला 13 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दिया है। फैसला लडके के परिजनों व लदियापुर गांव के सरपंच इसराइल की अपील पर टाला गया है। लड़के के फूफा ने पंचायत को विश्वास दिलाया कि उक्त वैवाहिक रिश्ते की डोर को वे एक बार फिर जैसे भी हो जोड़ने का प्रयास करेंगे।


 इसके लिए उन्हें 15 दिन का समय चाहिए। महापंचायत में आए पंचों के समक्ष की गई इस अपील को पंचों ने मान लिया तथा 13 जनवरी के बाद फैसला सुनाने का निर्णय लिया। फिलहाल उक्त विवाहिता अपने ससुराल मलाई गांव में ही रहेगी। परिवारीजन पति-पत्नी  को समझाने का प्रयास करेंगे। पंचायत में मोबाइल पर दिए गए तलाक के मामले में उटावड़ गांव के सरपंच आस मोहम्मद ने कहा कि महापंचायत के 10 पंच तलाक के सभी पहलूओं, तलाक की प्रक्रिया तथा अन्य तथ्यों को इस्लाम के बडे़ आलिमों के सामने रखेंगे।
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  उनसे भविष्य के बारे में यह भी जानने का प्रयास किया जाएगा कि शरीयत के तहत अब विवाहिता का क्या भविष्य होगा। यह कवायद भी 13 जनवरी के बाद ही होगी। इससे पूर्व लडके पक्ष की तरफ से पांच लाख रुपये बतौर
सिक्योरिटी पंचायत के पंचों के समक्ष जमा कराने होंगे। मौके पर ही लड़के के फूफा इसराइल ने बतौर अग्रिम 50-50 हजार रूपये के दो चेक पंचों को सौंप दिए। शेष 4 लाख रुपये भी 13 जनवरी तक रिश्ता न चलने की स्थिति में जमा करा दिए जाएंगे। 

पंचायत में मलाई गांव के निवासी एवं पूर्व विधायक अजमत खान का कहना था कि जब पंचायत में पहले ही फैसला ले लिया गया था कि 29 दिसंबर को 5 लाख रुपये लड़के पक्ष को जमा कराने हैं उसके बाद पंचायत विवाहिता के भविष्य का फैसला करेगी तो इससे पूर्व ही लड़के पक्ष द्वारा विभिन्न माध्यमों से तलाक के फतवे तथा अन्य दबाव बनाने की क्या जरूरत थी।
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 पंचायत में आए पंचों ने लड़के पक्ष से इस बात पर नाराजगी भी जाहिर की कि समय पर बतौर सिक्योरिटी 5 लाख रुपये जमा नहीं कराए गए। इसके अलावा पंचायत के आदेश के मुताबिक लड़का स्वयं पंचायत में हाजिर नहीं हुआ है। दूसरी तरफ मोबाइल से तलाक देने वाले नसीम का कहना है कि वह अपने फैसले पर अभी भी कायम हैं। पंचायत भी इसे मानकर रहेगी। वहीं पीडिता असमीना जोकि ससुराल में ही रह रही है, उसका कहना है कि उसे पंचों पर विश्वास है, पंच जो फैसला लेंगे वह स्वीकार करेगी। 
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