पलवल। जिले में पुस्तकालयों को चलाने के नाम पर नगर परिषद द्वारा पिछले पांच साल में डेढ़ लाख रुपये खर्च करने का दावा किया जा रहा है, हालांकि शहर में एक भी पुस्तकालय चालू नहीं है। अब वह राशि पुस्तकालय के नाम पर कहां खर्च हुई इसका हिसाब भी नगर परिषद के पास नहीं है। इसका खुलासा आरटीआई में मांगी गई जानकारी से हुआ है।
आरटीआई में यह जानकारी तो दी गई कि शहर में नगर परिषद की तरफ से एक पुस्तकालय है, लेकिन वह बंद है या चल रहा है, इसकी जानकारी स्वयं नगर परिषद अधिकारियों के पास नहीं है। नगर परिषद द्वारा पांच साल में पुस्तकालय के नाम पर बजट में प्रावधान रख खर्च दिखाई गई राशि का हिसाब लेने के लिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की जा रही है। पुस्तकालयों के ऊपर दिखाई खर्च डेढ़ लाख की राशि के अलावा शहर में अन्य विकास कार्यों पर पांच साल में कितनी राशि खर्च की गई, इसका भी हिसाब एक अन्य आरटीआई के द्वारा मांगा जा रहा है।
पलवल शहर की आबादी करीब पांच लाख है। शहर में बुद्धिजीवी वर्ग द्वारा शिक्षित युवाओं द्वारा 2010 में पलवल शहर में पुस्तकालय खोलने की मांग उठाई गई थी। इस मांग को ध्यान में रखते हुए 2012 में नगर परिषद द्वारा हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित किला पार्क में पुस्तकालय की स्थापना की गई। पुस्तकालय के लिए उस समय करीब 20 लाख रुपये खर्च किए गए तथा वहां एक कमरा बनाया गया। उस कमरे में पुस्तकालय बना वहां महापुरुषों के जीवन चरित्र से संबंधित, आजादी आंदोलन, रामायण, महाभारत, गीता तथा जीवन में काम आने वाली पुस्तकें रखवाई गईं। पुस्तकालय के लिए नगर परिषद की तरफ से एक स्टाफ तथा एक चौकीदार की भी व्यवस्था की गई। इसके अलावा वहां पर दैनिक रूप से करीब पांच-छह राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र भी आते थे, जिन्हें हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों से भी बुजुर्ग जाकर पढ़ते थे। इसके अलावा शहर के काफी युवा भी समय व्यतीत करने के लिए उस पुस्तकालय में जाते थे, लेकिन एक साल तक ठीक चलने के बाद पुस्तकालय पर किसी ने ध्यान नहीं दिया और नगर परिषद ने वहां से चौकीदार व स्टाफ भी हटा लिया तथा कुछ दिन के बाद समाचार पत्र भी बंद हो गया। धीरे-धीरे वहां से पुस्तकें गायब होने लगी और वहां ताला लग गया। उस दिन से वहां आज तक ताला लगा हुआ है।
नगर परिषद का दावा खर्च की जा रही हर साल पुस्तकालय पर राशि
नगर परिषद की माने तो परिषद के बजट में वर्ष 2015-16 में 40 हजार, 2017-18 में इस पुस्तकालय पर मात्र 16 हजार रुपये खर्च दिखाए गए हैं, लेकिन यह राशि किस मद पर खर्च की गई, इसका जवाब नगर परिषद के पास नहीं है। इसी तरह से 2017-18 में साढ़े 17 हजार रुपये, 2018-19 में 18, 765 रुपये खर्च किए गए हैं जबकि 2019-20 में एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ। इसके अलावा 2018-19 में ही पुस्तकालय के लिए स्टाफ पर करीब 4 लाख, 9 हजार, 920 रुपये खर्च करने का प्रावधान रखा गया था, लेकिन यह राशि स्टाफ की नियुक्ति न होने के कारण खर्च नहीं की जा सकी। 2020-21 में 18 हजार रुपये खर्च दिखाए गए हैं।
शहर में पुस्तकालयों की बेहद जरूरत है। पुस्तकालय बनने चाहिए व उनमें हिंदी साहित्य की पुस्तकों के अलावा भारत की संस्कृति व सभ्यता से जुड़ी पुस्तकों को रखना चाहिए, ताकि युवाओं को संस्कृति व सभ्यता का ज्ञान हो।
- महेंद्र प्रसाद सिंगला, साहित्यकार
जब मैं चेयरमैन था, हमारे द्वारा शहर में पुस्तकालय स्थापित किया गया था, लेकिन 2016 के बाद भाजपा सरकार आने पर पुस्तकालय खतम कर दिया गया। पुस्तकालय के नाम पर जो राशि हर साल खर्च दिखाई जा रही है, उसका हिसाब लेना चाहिए।
- केशव देव मुंजाल, चेयरमैन नगर परिषद पलवल
मैं इस बारे में पूरी जानकारी लूंगा। शहर में जो पुस्तकालय बंद पड़ा है, उसे शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा। वहां जो कमीं है, उसे दूर कराया जाएगा तथा पुस्तकालय में पुस्तकों के अलावा स्टाफ भी तैनात किया जाएगा।
- मनोज यादव, कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद