संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। दिवाली के बाद बेशक गोवर्धन एक दिन बाद मनाया जा रहा है, लेकिन दिवाली के बाद दूसरे दिन भी शहर में सोमवार को जमकर आतिशबाजी हुई। जिससे जिले में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया। दिवाली के दूसरे दिन सोमवार को जहां प्रदूषण का स्तर 338 था, वहीं मंगलवार को गोवर्धन वाले दिन स्तर बढ़कर 398 पर पहुंच गया। जिससे जिले की आबोहवा बेहद खराब रही। इतना अधिक प्रदूषण होने के कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कत रही। स्वस्थ व्यक्ति भी इतने अधिक प्रदूषण के कारण मुंह पर मास्क पहनकर सड़क पर चलते देखे गए।
दिवाली पर पटाखों की बिक्री व चलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध था, लेकिन उसके बावजूद जिले में दिवाली के दिन ही नहीं दूसरे दिन भी जमकर आतिशबाजी हुई। पूरा शहर आतिशबाजी के चलने से धुएं में घिरा नजर आया। चारों तरफ धुआं ही धुआं नजर आ रहा था। यहां तक की आसमान भी धुएं के कारण सफेद नजर आ रहा था। आतिशबाजी के बाद प्रदूषण का स्तर काफी खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया। पीएम2- 302 नोट किया गया, जबकि पीएम10- का स्तर 398 नोट किया गया। आतिशबाजी के चलते नाइट्रोजन व अमोनिया का स्तर भी काफी अधिक रहा।
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आसमान में स्मॉग फैला रहा
बीते दो दिनों से जिले में चारों तरफ आसमान में स्मॉग फैला हुआ है। प्रदूषण के कारण लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। प्रदूषण का असर उन लोगों के हृदय पर भी भारी पड़ सकता है, जो पहले से ही उच्च रक्तचाप और गुर्दे की बीमारी से पीड़ित हैं। चिकित्सकों के मुताबिक का प्रदूषण का स्तर लोगों की सेहत को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। चिकित्सकों का कहना है कि प्रदूषण का स्तर अधिक होने के कारण सांस, अस्थमा, उच्च रक्तचाप तथा गुर्दा रोग से पीड़ित लोगों को घरों में रहना चाहिए। जरूरत पर बाहर जाएं तथा उस समय मुंह पर मास्क पहनें। स्वस्थ लोगों को भी मुंह पर मास्क लगाना चाहिए तथा आंखों पर चश्मा लगाना चाहिए।
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खूब बिके पटाखे
जिले में खुलेआम पटाखे बिके। लोगों ने बाहर सड़क पर दुकानों के सामने ही चारपाई पर पटाखे रखकर बेचे, जो न तो प्रशासन को दिखाई दी और न ही पुलिस को, जबकि जिले में पटाखे बेचने पर पूरी तरह से प्रतिबंंध था। यही कारण रहा कि पिछले दो दिनों से लगातार आतिशबाजी हो रही है।
जाने-माने आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. धर्म प्रकाश आर्य का कहना है कि इस समय प्रदूषण ज्यादा खतरनाक रहता है, क्योंकि आतिशबाजी से प्रदूषण में कई तरह के खतरनाक तत्व मिल जाते हैं। ऐसे में बचाव ही सुरक्षा है। घर से कम से कम निकलना चाहिए तथा सुबह व शाम की सैर बंद कर देनी चाहिए। साथ ही बाहर से घर आने पर गुनगुने पानी का सेवन करना चाहिए। आंंखों में ठंडे पानी की छींटे मारने चाहिए तथा डॉक्टर से सलाह लेकर दवा डालनी चाहिए। सुबह उठकर गर्म पानी के गरारे करने चाहिए।