पलवल। स्वास्थ्य विभाग एक तरफ कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन से लड़ने के लिए हर तरह से तैयार होने का दावा का रहा है, लेकिन वहीं जिला नागरिक अस्पताल में आज भी न तो अस्थमा व सांस रोग के लिए कोई डॉक्टर है और न ही सामान्य मेडिसन का डॉक्टर है। जिसके चलते आज भी अस्थमा व सांस रोग से पीड़ित लोगों को मजबूरी में अस्पताल के अन्य डॉक्टरों से अपना इलाज कराना पड़ रहा है। इसके अलावा अन्य रोगों का उपचार करने वाले चिकित्सक भी कम ही हैं। लोग आए दिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अलावा स्वास्थ्य मंत्री तथा मुख्यमंत्री से कई बार गुहार लगा चुके हैं।
जिला नागरिक अस्पताल में ठंड बढ़ने तथा प्रदूषण के कारण आए दिन अस्थमा व सांस रोगों से पीड़ित मरीज बड़ी संख्या में आ रहे हैं। प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज सांस रोग से पीड़ित आ रहे हैं। लेकिन सामान्य मेडिसन व अस्थमा रोग विशेषज्ञ न होने के कारण मजबूरी में निजी अस्पतालों का भी सहारा लेना पड़ रहा है। जहां काफी खर्च आता है। यदि कोई मरीज आयुर्वेद चिकित्सक से जांच करा रहा है तो अस्पताल में उसे पर्याप्त मात्रा में दवाइयां नहीं मिल रही हैं।
अस्थमा के लक्षण
दमा या अस्थमा के मरीज को सांस लेने में परेशानी होती है, दम फूल जाता है, बलगम वाली खांसी आती है। यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है। दमे के मरीज को रात में ज्यादातर परेशानी होती है। बढ़े हुए दमा में मरीज को खांसी का दौरा भी पड़ सकता है, जो कुछ घंटों तक भी जारी रह सकता है। यहां तक कि दौरे के दौरान मरीज की मौत भी हो सकती है।
बीमारी के कारण
अस्थमा का कारण वंशानुगत भी माना गया है। इसके एलर्जिक कारण भी होते हैं। इसके अलावा धुएं व धूल के संपर्क में ज्यादा रहना, रूई, रेशे आदि के बीच काम करना, दमघोंटू माहौल में रहने या काम करने को मजबूर होना, ठंडे माहौल में ज्यादा रहना, धूम्रपान, प्रदूषण आदि ऐसे कारक हैं, जो इस रोग होने में सहायक होते हैं।
उपचार का तरीका
इस रोग को खत्म करना संभव नहीं है, रोग की तीव्रता कम की जा सकती है। इलाज डॉक्टर से ही कराएं। कराएं। इसके बढ़ने के कारणों से बचें। परीक्षण, फेफड़ों की जांच तथा एलर्जी के कारकों का पता लगाकर किया जाता है। रोगी को एलर्जी से मुक्त करने के लिए इन्हेलर्स का प्रयोग किया जाता है। थकान का काम न करें। सांस फूलने लगे ऐसा श्रम न करें। नियमित व्यायाम, पौष्टिक आहार, खुली हवा में लंबी-लंबी सांस लेना लाभदायक रहता है।
कोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन जिस तरह से देश में तेजी से फैल रहा है, यदि पलवल में इसके मरीज मिल गए तो उन मरीजों का इलाज कैसे होगा। इसके अलावा कोरोना के मरीजों में भी सांस लेने में दिक्कत व गले में दिक्कत बनती है। मुझे सांस की बीमारी है, लेकिन जिला अस्पताल में कोई चिकित्सक न होने के कारण मुझे मजबूरी में निजी अस्पताल में सांस अधिक फूलने पर इलाज कराना पड़ता है।
-नारायण, रहीमपुर
मुझे सांस की बीमारी है। मैं जब भी जिला नागरिक अस्पताल में आता हूं, मुझे यह कहकर वापस भेज दिया जाता है कि चिकित्सक नहीं है। इस कारण मजबूरी में मुझे निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। अस्थमा होने के कारण दवाइयां चलती रहती हैं। दवाइयां तक अस्पताल में नहीं मिलती। प्रदूषण व ठंड बढ़ने पर सांस अधिक फूलने लगता है। इस तरफ ध्यान दिया जाए।
- सौदान सिंह, पलवल
जिला अस्पताल में अस्थमा रोग का इलाज करने के लिए विशेषज्ञ नहीं है। इसके अलावा सामान्य मेडिसन का भी चिकित्सक नहीं है। इसके लिए विभाग को लिखा हुआ है। फिलहाल इधर-उधर से काम चला रहे हैं। चिकित्सकों के न होने के बावजूद लोगों को पूरा इलाज दिया जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं में किसी तरह की कोताई नहीं बरती जा रही है।
-डॉ. लोकवीर, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी