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गांवों में चढ़ने लगा है हुरियारों का रंग

Wed, 23 Mar 2016 10:42 PM IST
ब्यूराो अमर उजाला
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होली - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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 होली का पर्व नजदीक आने के साथ ही गांवों में हुरियारों का रंग चढ़ने लगा है। ब्रज क्षेत्र से जुड़े होने के चलते जिले के गांवों में होली को लेकर विशेष उत्साह रहता है। गांवों में कई-कई दिनों पहले से ही रसिया के लोकगीतों पर लोगों का झूमना शुरू हो जाता है। आते-जाते लोगों पर चुटीले कटाक्ष भी खूब सुनने को मिलते हैं।
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हालांकि आधुनिकता ने ब्रज पृष्ठभूमि के इस क्षेत्र के गांवों के लोगों को भी अपने रंग में रंग लिया है, लेकिन फिर भी यह लोग अपनी संस्कृति को नहीं भूले हैं। शाम के समय जब गांव की बुजुर्ग महिला व पुरुष गांव की गलियों में होली के रंग में रंगना शुरू होते हैं तो युवा भी इनके साथ ही रंग जाते हैं। फिर मस्ती का कार्यक्रम शुरू हो जाता है, जो देर रात तक चलता है।


यूपी की सीमा से लगते ब्रज क्षेत्र के गांवों बंचारी, सौंदहद व औरंगाबाद जैसे बड़े गांवों में शाम ढलते ही हुरियारों की टोलियां गांवों की गलियों में गाते बजाते हुए घूमने लगती है। जिस घर के सामने हुरियारी मिल जाती हैं, वहां ढोलक की थाप पर लोकनृत्य प्रतियोगिता का दौर शुरू हो जाता है। 
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गांवों में आज भी होली के रसियों गीत की धूम रहती है। हुरियारों की टोली आज भी -आज बिरज में होरी रे रसिया, होरी रे रसिया बरजोरी रे रसिया जैसे गीतों पर लोकनृत्य से माहौल रंगीन होने लगता है। वहीं हुरियारी  "मेरे धोरे आ श्याम तोपे रंग डारू जैसे गीतों पर खूब झूमती हैं। 
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