पलवल। हेपेटाइटिस के कारण लिवर में सूजन आ जाती है। लिवर भोजन पचाने के साथ खून से टॉक्सिन्स को भी साफ करने में अहम भूमिका निभाता है, इसलिए लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। इस बीमारी में कुछ लोगों का लिवर काम करना बंद कर देता है और गंभीर स्थिति में मौत भी हो जाती है। कुछ साल पहले इसका इलाज बेहद मुश्किल था, लेकिन जिले में अब स्वास्थ्य विभाग पूर्ण इलाज कर हेपेटाइटिस के मरीजों को ठीक कर रहा है। जिला अस्पताल में विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को जागरूक किया गया।
हेपेटाइटिस विषाणु जनित रोग है। इसे ए, बी, सी, डी और ई श्रेणी में रखा जाता है। भारत के तीन से पांच फीसदी प्रतिशत लोग हेपेटाइटिस बी के संक्रमण से जूझ रहे हैं। हेपेटाइटिस बी और सी अधिक गंभीर हैं। इनसे लिवर को गंभीर क्षति पहुंच सकती है। करीब 90 फीसदी लोगों को यह पता नहीं चलता कि वे हेपेटाइटिस से संक्रमित हैं। जब तक उन्हें पता चलता है, तब तक यह संक्रमण लिवर को काफी नुकसान पहुंचा देता है। पलवल के जिला नागरिक अस्पताल में रक्त बैंक शुरू होने के बाद अनेक ऐसे रोगी पाए गए हैं, जो हेपेटाइटिस से पीड़ित थे। हेपेटाइटिस ए और ई कम गंभीर और आमतौर पर अल्पकालिक संक्रमण होते हैं, जो साधारण इलाज से ठीक हो जाते हैं। दूषित पानी और खाना खाने से यह होता है। हेपेटाइटिस डी को डेल्टा वायरस कहते हैं। इससे लिवर में जलन और सूजन की समस्या हो जाती है। लिवर कैंसर होने का खतरा भी रहता है। किसी को हेपेटाइटिस बी और सी है तो उसे हेपेटाइटिस-डी होने का खतरा रहता है। पहले जिला नागरिक अस्पताल में हेपेटाइटिस का इलाज नहीं था, लेकिन अगस्त 2019 के बाद यहां हेपेटाइटिस की जांच कर इलाज किया जाता है। टेस्ट में संक्रमित पाए जाने पर मरीज का आरटीपीसीआर टेस्ट होता है। आरटीपीसीआर के लिए विभाग द्वारा कूपन दिए जाते हैं, जिससे लैब में उनका निशुल्क टेस्ट किया जाता है।
दो साल में 25 हजार लोगों की जांच
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. मंजीत ने बताया कि अस्पताल में पिछले दो साल में 14 हजार हेपेटाइटिस सी के टेस्ट किए गए, जिनमें 110 संक्रमित मिले। 66 का आरटीपीसीआर टेस्ट हुआ तो उनमें से 40 संक्रमित पाए गए। विभाग द्वारा 32 का नियमित इलाज किया गया, जो पूर्ण रूप से ठीक हो चुके हैं। इसी प्रकार 10947 हेपेटाइटिस बी के टेस्ट किए गए। इनमें 91 संक्रमित मिले। आरपीसीआर में केवल तीन मरीजों की पुष्टि हुई, जिनका उपचार चल रहा है। हेपेटाइटिस सी प्रारंभिक अवस्था में पता चलने पर तीन से छह महीने में ठीक हो जाता है, जबकि हेपेटाइटिस बी वायरस संक्रमित व्यक्ति का इलाज लंबा चलता है। (संवाद)
लक्षण
- हमेशा थकान महसूस होना
- भूख न लगना, पेट दर्द
- सिर दर्द, चक्कर आना
- यूरिन का पीला होना
- कई दिनों तक तेज बुखार
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बचाव
- एल्कोहल, तंबाकू, ड्रग्स के सेवन से बचें।
- समय रहते टीकाकरण कराएं और तनाव कम लें।
- तैलीय, मसालेदार, मांसाहारी और भारी खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें।
- हरी पत्तेदार सब्जियां, विटामिन-सी युक्त फल, शाकाहारी आहार, ब्राउन राइस, पपीता, नारियल पानी, सूखे खजूर, किशमिश, बादाम और इलायची का भरपूर सेवन करें।