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Palwal News: हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, सिविल सर्जन नूंह से मांगी रिपोर्ट

Wed, 06 Aug 2025 11:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल
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सामान्य अस्पताल मंडीखेड़ा में डिलीवरी के दौरान नवजात का हाथ कटने का मामला
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मोहम्मद शाहिद मेवाती

तावड़ु-चंडीगढ़। हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने मांडीखेड़ा (नूंह) स्थित नागरिक अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात शिशु का एक हाथ कट जाने के मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से प्रसव के दौरान शामिल डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ के नाम और पदनाम, शिशु का अंग कटने के कारणों की स्पष्ट जानकारी के साथ मासूम के इलाज और पुनर्वास के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। साथ ही विभागीय जांच और पीड़ित परिवार के साथ कथित दुर्व्यवहार पर भी स्पष्टीकरण मांगा है।
बता दें कि जिले के सामान्य अस्पताल मंडीखेड़ा में डिलीवरी के दौरान गत 30 जुलाई को एक नवजात का हाथ पूरी तरह कटकर अलग हो गया था। इस दर्दनाक घटना को लेकर डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगे थे। चंडीगढ़ मानव अधिकार आयोग के अनुसार एक अगस्त को विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर के आधार पर यह कदम उठाया है। आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस ललित बत्रा, सदस्य कुलदीप जैन व दीप भाटिया ने इसे संरक्षित जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार का घोर उल्लंघन मानते हुए कहा कि यह मामला सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सेवाओं की गिरती स्थिति और मानवीय संवेदनाओं के अभाव की गंभीर तस्वीर पेश करता है। आयोग ने यह भी कहा कि यह घटना बाल अधिकारों के अंतरराष्ट्रीय संधि के अनुच्छेद 6 और 19 का भी सीधा उल्लंघन है। इसके तहत हर बच्चे को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का अधिकार प्राप्त है। आयोग ने कहा कि इस मामले में मां और नवजात दोनों की गरिमा और अधिकारों का गंभीर हनन हुआ है।
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आयोग ने इस आदेश की प्रति स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, आयुष विभाग, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, सचिव, और हरियाणा के स्वास्थ्य महानिदेशक को भी भेज दी है, ताकि मामले में जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। आयोग ने अगली सुनवाई की 26 अगस्त तय की है।
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ये था मामला
30 जुलाई को मंडीखेड़ा सिविल अस्पताल में सरजीना पत्नी शकील की डिलीवरी के दौरान चिकित्सकीय लापरवाही के कारण नवजात का हाथ पूरी तरह से शरीर से अलग हो गया। आरोप था कि जब परिवार ने सवाल उठाए तो डॉक्टरों ने दुर्व्यवहार किया, गाली-गलौज की और उन्हें वार्ड से बाहर निकाल दिया। इसके बाद बच्चे को गंभीर हालत में नल्हड़ मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।
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