फरीदाबाद के गांव छायसां स्थित गोल्ड फील्ड मेडिकल कॉलेज के कर्मचारियों ने शनिवार सुबह शहर में प्रदर्शन कर सीएम के राजनीतिक सचिव दीपक मंगला को ज्ञापन सौंपा। इससे पूर्व कर्मचारियों ने पृथला के विधायक टेकचंद शर्मा से भी समस्या को लेकर गुहार लगाई।
कर्मचारियों का कहना था कि कॉलेज पर पिछले एक वर्ष से ताला जड़ा हुआ है। जिसके कारण कॉलेज में नियुक्त करीब 500 कर्मचारियों के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है। कर्मचारियों ने कहा कि विधानसभा में भी मेडिकल कॉलेज का मामला उठा था।
सरकार ने कॉलेज के छात्रों को तो एडजस्ट कर दिया गया, लेकिन उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है। दीपक मंगला और विधायक टेकचंद शर्मा ने कर्मचारियों के मामले को सीएम के संज्ञान में लाकर समाधान का भरोसा दिलाया है।
दरअसल फीस विवाद के चलते जुलाई 2015 से गोल्ड फील्ड मेडिकल कॉलेज अस्थिर स्थिति में है। इस समय कॉलेज में सुपरवाइजर, सफाई कर्मचारी, माली गार्ड सहित करीब 500 कर्मचारी काम करते हैं। जिन्हें पिछले एक वर्ष से वेतन नहीं मिला रहा है। कर्मचारी रोज आते हैं और वापस घर लौट जाते हैं।
कर्मचारी राजकुमार भाटी, नरेश भारद्वाज, महेंद्र, शिवकुमार, वीरपाल, प्रेमलता, लज्जा व कस्तूरी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के बंद होने से उनके सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज के बंद होने से आसपास के गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं भी चरमरा गई हैं। पहले यहां ग्रामीणों का फ्री इलाज हो जाता था, लेकिन अब ग्रामीणों को 10-12 किलोमीटर दूर शहर जाना पड़ रहा है। वहीं कॉलेज के बंद होने से करीब 500 कर्मचारी बेरोजगारी के कगार पर पहुंच गए हैं। कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार से दोबारा कॉलेज शुरु करने की मांग की है।
वहीं पृथला के विधायक टेकचंद शर्मा ने कर्मचारियों से कहा है कि वे इस मामले को लेकर व्यक्तिगत तौर पर स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से मिल चुके हैं। जिस पर अनिल विज ने कॉलेज शुरू करने का आश्वासन दिया, है लेकिन टेकओवर में अभी समय लगेगा क्योंकि यह सरकारी कार्रवाई है। जरूरत पड़ी तो वे इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाएंगे।