पलवल। कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के अधिक संक्रमित होने की आशंका के चलते स्वास्थ्य विभाग स्तर हो गया है। विभाग ने तीसरी लहर की संभावना के चलते 300 ऑक्सीजन बेड की उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। लहर आती है तो खंड स्तर पर भी बच्चों के लिए आइसोलेशन वार्ड तैयार किए जाएंगे। हालांकि बाल रोग विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की इम्यूनिटी जवान व बुजुर्गों के मुकाबले ज्यादा होती है। करीब 90 प्रतिशत बच्चों में कोरोना के सामान्य लक्षण ही मिलते हैं।
देश में हुई सीरो सर्वे के अनुसार कोरोनी की तीसरी लहर में बच्चों को पर ज्यादा प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। सरकार ने बच्चों को ज्यादा सावधानी से रखने की हिदायत जारी की है। बीमारी के चलते जिला प्रशासन नेसभी सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों को हिदायत दी गई है कि वे तीसरी लहर को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें। जितना प्रबंध कर सकते हैं उसकी पूरी तैयारियां करें। बाल रोग विशेषज्ञों के पास उपचार के लिए आने वाले बच्चों का कोरोना टेस्ट करवाने के निर्देश दिए गए हैं। संक्रमित पाए जाने पर जिला अस्पताल को सूचना देने के लिए कहा गया है।
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बच्चों की इम्युनिटी का ध्यान रखें
बच्चों में कोरोना के लक्षण अभी भी पाए जा रहे हैं। बच्चों का इम्युनिटी मजबूत होने के कारण ज्यादा प्रभावित नहीं कर पा रहा है। जवान और बुजुर्गो की अपेक्षा बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होती है, इसलिए वे जल्दी स्वस्थ हो रहे हैं। बुजुर्गो और जवानों को कोरोना वैक्सीन लगाए जाने के बाद कोरोना का ज्यादा असर बच्चों पर हो सकता है। कोरोना वायरस जिस प्रकार रूप बदल रहा है उसके देखते हुए बच्चे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। फिलहाल 90 प्रतिशत बच्चों में सामान्य लक्षण पाए जा रहे हैं। बच्चों को इम्युनिटी बढाने वाली चीजें ज्यादा और मीठा कम खिलाएं। किसी भी वायरस को जिंदा रहने या पैदा होने के लिए ग्लूकोज की जरूरत होती है।
- डॉ.वासुदेव, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल