पलवल। कोरोना संक्रमण मरीजों से इलाज के नाम पर प्रशासन द्वारा तय रेट से अधिक बिल वसूलने तथा पलवल से चंडीगढ़ तक एंबुलेंस के नाम पर 1.10 लाख रुपये किराया लेने के आरोप में पुलिस ने आखिरकार निजी अस्पताल संचालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। अमर उजाला में निजी अस्पताल संचालकों द्वारा कोरोना संक्रमण मरीजों से लिए जा रहे तय रेट से अधिक बिल मामले को प्रमुखता से दो दिन तक लगातार प्रकाशित किया गया था। अमर उजाला के समाचार पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव अमित अग्रवाल ने उपायुक्त को मामले में जांच के आदेश दिए थे। उपायुक्त द्वारा उप आबकारी अधिकारी के नेतृत्व में गठित टीम द्वारा जांच कराने तथा पुलिस द्वारा दी गई रिपोर्ट के आधार पर शुक्रवार को कैंप थाना पुलिस ने रवि रावत वकील के बयान पर अस्पताल संचालकों के खिलाफ आपदा प्रबंधन एक्ट 2005 की धारा 51(बी) तथा धारा 120 बी, 188, 469,270 तथा 384 के तहत मुकदमा दर्ज्र कर लिया है।
जिले में कोरोना संक्रमण बढ़ने के साथ ही जिला प्र्रशासन द्वारा पलवल के निजी अस्पतालों को भी कोविड मरीजों के लिए सुनिश्चित किया था। जिसके बाद पलवल के तीन-चार निजी अस्पतालों द्वारा कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती कर सरकार द्वारा तय रेट से अधिक बिल वसूलने शुरू कर दिए। इस बात पर कई मरीजों के परिजनों ने हंगामा भी किया था। इसी दौरान युवा कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष तथा हथीन क्षेत्र से विधानसभा का चुनाव लड़ चुके डॉ. शक्ति सिंह रावत के पुत्र रवि रावत ने अपनी मां को निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां अस्पताल संचालकों ने मात्र दो घंटे के 75 हजार रुपये बिल ले लिया तथा बाद में तबियत ज्यादा खराब होने पर उन्हें कहीं और ले जाने को बोल दिया। जिसके बाद डॉ. शक्ति सिंह रावत ने अपनी पत्नी को चंडीगढ़ पीजीआई में भर्ती कराने के लिए बात कर ली। जिस पर पलवल से चंडीगढ़ तक मरीज को छोड़कर आने के लिए निजी अस्पताल संचालकों द्वारा 1 लाख, 10 हजार रुपये किराया वसूल किया। उस समय मजबूरी में इतनी बड़ी राशि रवि रावत ने जमा करा दी। अब मां के ठीक होने के बाद रवि रावत ने उपायुक्त व पुलिस अधीक्षक को इस बात की शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इतना ही नहीं रवि रावत ने उपायुक्त से निजी अस्पतालों के खिलाफ प्रदर्शन की भी मंजूरी मांगी, लेकिन वह भी नहीं मिली।
रवि रावत व अन्य कई पीड़ित परिजनों की बात को अमर उजाला द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित किया गया। 17 मई को अमर उजाला में निजी अस्पताल संचालकों की मनमानी का समाचार प्रकाशित होते ही मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उस पर संज्ञान लिया तथा उनके अतिरिक्त प्रधान सचिव अमित अग्रवाल ने उपायुक्त को मामले की जांच कराने के आदेश दिए। जिस पर उप आबकारी अधिकारी के नेतृत्व में एक कमेटी गठित कर जांच शुरू करा दी गई। जांच कमेटी ने भी निजी अस्पतालों के खिलाफ उपायुक्त को रिपोर्ट सौंप दी। उधर कैंप थाना पुलिस के जांच अधिकारी संजय कुमार ने भी अपनी रिपोर्ट में अस्पताल संचालकों को दोषी मानते हुए आपदा प्रबंधन एक्ट 2005 की धारा 51(बी) सहित अन्य धाराओं में रवि रावत के बयान पर मुकदमा दर्ज कर लिया है।
रवि रावत दी शिकायत में कहा गया है कि कुछ निजी अस्पताल संचाकलों ने उनकी मां को दाखिल करने के लिए 75 हजार रुपये प्रतिदिन मांगे तथा वकील होने की जानकारी मिलने पर दाखिल करने से मना करदिया। बाद में एंबुलेंस से चंडीगढ़ ले जाने के नाम पर 1 लाख, 10 हजार रुपये वसूल लिए। वहीं अन्य कई मरीजों से भी दो-दो घंटों के 50 से 58 हजार रुपये तक बिल वसूला गया। पुलिस जांच अधिकारी संजय कुमार का कहना है कि मामले में आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।