होडल (रोशन लाल शर्मा)। पशुपालन के द्वारा किसान की आय दोगुनी करने का सरकार का सपना पशु चिकित्सकों की कमी से साकार होता नजर नहीं आ रहा है। प्रदेश सरकार भवन व दवा के रूप में करोड़ों रुपये का बजट खर्च कर रही है, लेकिन अधिकारियों के न होने से भवन जर्जर पड़े हैं। स्थिति यह है कि अधिकांश चिकित्सालयों पर ताला जड़ा रहता है, ऐसे में पशुपालकों को काफी परेशानी होती है।
सरकार द्वारा किसानों के मवेशियों के लिए जिले में 27 पशु अस्पताल व 87 डिस्पेंसरी खोली गई है। सिर्फ 14 अस्पतालों में चिकित्सक, जबकि 48 पशु डिस्पेंसरियों में ही पशु सहायक नियुक्ति किए गए हैं। अभी भी 14 चिकित्सकों व 58 पशु सहायकों के पद रिक्त हैं। विभाग के आंकड़ों के अनुसार तीन उपमंडल अधिकारी के पद स्वीकृत हैं, जिसमें से एक खाली है। वहीं ब्लॉक अधिकारी के चारों पद खाली हैं। जिले में पशु सहायकों के 116 पद स्वीकृत हैं। जिनमें से 31 पद रेगुलर व 27 पद अनुबंध के आधार पर भरे गए हैं। विभाग में कुल 408 स्वीकृत पदों में से 181 ही भरे हुए हैं जबकि अधिकारियों और कर्मचारियों के 199 स्वीकृत पद रिक्त हैं। इसकी वजह से पशुपालकों को चिकित्सा के साथ ही पशुओं का बीमा, पोस्टमार्टम, लोन के लिए प्रमाणपत्र जैसी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं।
वर्जन-
पशु सहायकों और चिकित्सकों की नियुक्ति को लेकर उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर मांग की गई है। आश्वासन मिला है कि जल्द ही नियुक्ति की जाएगी। - डॉ. नरेंद्र सिंह, उपनिदेशक, पशु पालन विभाग