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रिकॉर्ड जमा न करने पर कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज होगा केस

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पलवल। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की जांच के लिए रिकॉर्ड नहीं देने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सभी कर्मचारियों के खिलाफ जल्द ही मुकदमे दर्ज किए जाएंगे। कर्मचारियों को दो दिन में रिकॉर्ड जमा करवाने के नोटिस दिए गए थे, लेकिन पांच दिन बीत जाने के बावजूद भी रिकॉर्ड जमा नहीं करवाए गए हैं। इस संबंध में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी अलग-अलग नोटिस जारी कर चुके हैं। इनके अलावा मनरेगा लोकपाल पंकज शर्मा को भी नोटिस जारी हो चुका है। रिकॉर्ड नहीं मिलने से मनरेगा की जांच प्रभावित हो रही है।
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दरअसल, मनरेगा में बरती गई अनियमितताओं की जांच लोकपाल पंकज शर्मा द्वारा की जा रही है। मनरेगा से जुडे़ं आठ कर्मचारियों ने 12 मार्च को स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देने से पहले कर्मचारियों को रिकॉर्ड जमा करवाना था, लेकिन रिकॉर्ड जमा करवाने के लिए नोटिस देना पड़ा। नोटिस जारी होने के बाद भी रिकॉर्ड जमा नहीं करवाए जा रहे हैं। इस्तीफा देने वालों में आनंद एबीपीओ, मनोज कुमार, तालिब हुसैन, संजीत कुमार तथा लेखा सहायक संतराम, जीतराम, महेश कुमार और कपिल कुमार शामिल हैं।
पुलिस के जरिये बरामद किया जाएगा रिकॉर्ड
सीईओ जिला परिषद के हवाले से बताया गया कि मनरेगा योजना से इस्तीफा देने वाले आठ कर्मचारियों को 14 मार्च को नोटिस जारी कर दो दिन में रिकॉर्ड जमा करवाने के आदेश दिए गए थे। पांच दिन बीत जाने के बावजूद भी कर्मचारियों द्वारा रिकॉर्ड जमा नहीं करवाया गया है। रिकॉर्ड लेने के लिए सोमवार को सभी कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करवाए जाएंगे। पुलिस के जरिये रिकॉर्ड बरामद करवाया जाएगा।
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इस्तीफा देने से पूर्व करने थे जमा
लोकपाल पंकज शर्मा ने बताया कि नियमानुसार, इस्तीफा देने से पहले विभाग को रिकॉर्ड जमा करवाया जाना चाहिए था, लेकिन किसी भी कर्मचारी ने रिकॉर्ड जमा नहीं करवाया। इस्तीफा देने से कानूनी कार्रवाई रोकी नहीं जा सकती है। मनरेगा में पिछले दो साल में करीब 50 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है। कोरोना काल में भी मिट्टी डालने के नाम पर 26 करोड़ रुपये निकाल लिए गए। घोटाले में जो भी दोषी है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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