पलवल (अनूप पाराशर)। बाबा अस्पताल में खड़े रहकर समय बरबाद न करो, बाहर जाओ और एंटी रैबीज का टीका ले आओ, हम लगा देंगे। यहां टीका उपलब्ध नहीं है। इसलिए बाहर भी हमने कागज पर लिखकर चिपकाया हुआ है। ‘बेटा मैं गरीब आदमी हूं, इतने पैसे कहां से लाऊंगा। एक टीका 350 रुपये का आता है। सरकार तो बोल रही है कि सरकारी अस्पतालों में सारी सुविधाएं मिल रही हैं, पर यहां तो एंटी रैबीज टीका का नहीं है और न ही दर्द तक की गोलियां। ऐसे में गरीब आदमी कहां जाकर इलाज कराएगा।’ यह कहना था कौंडल गांव निवासी शिव कुमार का, जो कुत्ता काटने के बाद जिला नागरिक अस्पताल में एंटी रैबीज का टीका लगवाने आया था। अकेला शिव कुमार ही नहीं ऐसे कई गरीब मजदूर अस्पताल में कुत्ता काटने के बाद टीका लगवाने को घूमते नजर आए, लेकिन अस्पताल में टीका नहीं मिला। बताया गया कि अस्पताल में पिछले सवा महीने से टीका उपलब्ध नहीं है। उसके अलावा कई ऐसी दवाइयां हैं, जो अस्पताल में नहीं है। मजबूरी में लोगों को बाहर मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही हैं।
अस्पताल में 200 बेड, लेकिन सुविधाएं जीरो
जिला नागरिक अस्पताल कहने को तो 200 बेड का जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर अस्पताल में कुछ नहीं है। अस्पताल में हालात ये हैं कि कई बार दर्द, बुखार, कैल्शियम की गोलियां तक नहीं मिलती। डॉक्टर पर्ची पर जो दवाइयां लिखते हैं, फार्मेसी पर तैनात स्टाफ यह कहकर मना कर देते हैं कि दवाइयां खत्म हो गई हैं। बुधवार को भी अस्पताल में ऐसा ही हाल देखने को मिला। मरीज कहीं एंटी रैबीज टीका लगवाने को तो कहीं दवाइयां लेने को भटकते रहे। वहीं अस्पताल में कक्षा छह से आठवीं तक के स्कूल खुलने के बाद फिटनेश प्रमाण पत्र बनवाने आ रहे बच्चों को डॉक्टरों के समय पर न मिलने के कारण दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। उनके साथ आए अभिभावक भी डॉक्टरों को खोजते नजर आए।
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समय: सुबह 10.30 बजे
स्थान: एंटी रैबीज टीकाकरण कक्ष
सुबह के 10.30 बजे जिला नागरिक अस्पताल में एंटी रैबीज टीकाकरण कक्ष के बाहर लोगों की भीड़ लगी हुई थी तथा लोग वहां मौजूद स्टाफ से उलझ रहे थे। कारण एंटी रैबीज टीका न होना था। स्टाफ का कहना था कि टीका पीछे से नहीं आए हैं। लोगों का कहना था कि वे मजदूर हैं तथा कहां से इतने महंगे टीके लगवाएंगे।
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समय: 10.45
स्थान : फार्मेसी, जिला नागरिक अस्पताल
अस्पताल में स्थित फार्मेसी के बाहर मरीजों की डॉक्टरों से दवा लिखवाने के बाद दवा लेने के लिए लाइन लगी हुई थी। फार्मेसी पर आलम यह था कि किसी को कैल्शियम वाली गोलियां नहीं मिल रही थीं तो किसी को दर्द की गोली नहीं मिली। मरीज डॉक्टरों द्वारा पर्ची पर लिखी दवाइयां तक नहीं मिल रही थीं।
मैं मजदूर हूं तथा मेरी बेटी को कुत्ते ने काट लिया है। डॉक्टर ने बोला है कि पांच टीके लगवाने होंगे, लेकिन अस्पताल में आज छुट्टी लेकर आया हूं तो यहां टीके नहीं है। यहां से बोला जा रहा है कि बाहर से टीके लेकर आओ। एक तरफ से छुट्टी करने पर वेतन कट गया और ऊपर से 350 रुपये का टीका लगवाओ। मजबूरी में बाहर से खरीदकर टीका लगवाना पड़ रहा है।
--जयराम, पलवल
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मैं कौंडल से यहां एंटी रैबीज का टीका लगवाने आया हूं, लेकिन यहां टीका नहीं है। मुझे अब 350 रुपये में टीका खरीदकर लगवाना पड़ रहा है। मेरे जैसे मजदूर के लिए यह बेहद कठिन है, पर मजबूरी है। अस्पताल में कभी भी आओ कभी टीके नहीं मिलते तो कभी दवाइयां नहीं मिलती।
-शिव कुमार, कौंडल
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अस्पताल में एंटी रैबीज टीके गुरुग्राम स्टोर से आते हैं। वहां कमी होने के कारण टीके नहीं आ पा रहे हैं। इस बारे में अवगत कराया गया है। जल्द ही टीके आ जाएंगे। प्रयास है कि लोगों को अस्पताल में सारी सुविधाएं मिले। मैं फिर भी जानकारी लेता हूं कि और क्या दिक्कतें आ रही है। साथ ही अन्य दवाइयों के बारे में भी जानकारी लूंगा कि कौन-कौन सी दवाइयां नहीं है। उनका भी इंतजाम कराया जाएगा।
-डॉ. ब्रह्मदीप सिंह, सिविल सर्जन पलवल