- पावसर गांव में योजना के सर्वेक्षण में धांधली का आरोप, उपायुक्त ने सीईओ को जांच के दिए आदेश
- धनाढ्य लोगों को योजना का लाभ देने और जरूरतमंदों को वंचित करने का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। मुख्यमंत्री प्लॉट योजना के तहत पावसर गांव में किए गए सर्वेक्षण को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष है। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना में अपात्र और संपन्न लोगों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, जबकि वास्तविक जरूरतमंदों को सूची से बाहर किया जा रहा है। सोमवार को गांव के सजिद, रणजीत, जीतू, शकुंतला, इरशाद, जमीला, जुनैद, सफिया और रसीद सहित कई ग्रामीण जिला उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ से मिले और उन्हें एक लिखित शिकायत सौंपी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि गांव की वर्तमान सरपंच शाहना अपने रिश्तेदारों जेठानी सहरुणा, चचिया ससुर नूर मोहम्मद और नजमुद्दीन को योजना का लाभ दिलवाने की कोशिश कर रही हैं, जबकि ये सभी पक्के मकानों में रहते हैं और आर्थिक रूप से सक्षम हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि योजना का उद्देश्य गरीब, भूमिहीन, अनुसूचित जाति वर्ग और बीपीएल परिवारों को आवासीय प्लॉट देना है, लेकिन सर्वेक्षण में उन्हें जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। ग्राम सचिव द्वारा बिना किसी भौतिक सत्यापन के लाभार्थियों की सूची सरकार को भेजी जा रही है, जिससे पात्र लोग वंचित हो रहे हैं। जिला उपायुक्त डॉ. वशिष्ठ ने ग्रामीणों की बात गंभीरता से सुनते हुए निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया। उन्होंने जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) जितेंद्र कुमार को इस मामले की गहराई से जांच करने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि योजना की पारदर्शिता बनाए रखी जाए और केवल उन्हीं लोगों को लाभ मिले जो वास्तव में पात्र हैं। साथ ही सर्वेक्षण प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों व सरपंच के खिलाफ कार्रवाई की जाए।