प्राथमिक पाठशाला नंबर चार की कक्षाएं पार्क में चल रही हैं। माली-कम-चौकीदार के रहने के लिए बनाए गए मकान को क्लासरूम का रूप दिया गया है।
महज एक अध्यापक बच्चों को पढ़ा रहा है। कमरे में बिजली की व्यवस्था तक नहीं है। शेष चार कक्षाओं के बच्चे पार्क में स्थित एक पेड़ के नीचे दरियों पर बैठे हुए पढ़ रहे हैं।
शिक्षकगण कुर्सियों पर विराजमान हैं। पढ़ाने के लिए श्यामपट्ट नहीं है। बच्चों के हाथों में किताबें हैं पर एक साल पुरानी क्योंकि नई पुस्तकें मिली नहीं हैं और न ही शीघ्र आने की उम्मीद है।
कथित स्कूल में बच्चों के लिए पीने के पानी तक की कोई व्यवस्था नहीं है। बच्चे घर से बोतलों में पानी लेकर आते हैं। ऐसी स्थिति में देश के भविष्य को तराशने का काम जारी है।
राजकीय पाठशाला की मुख्य अध्यापिका पुष्पा बांसल के अनुसार कमरा एक है, जबकि पाठशाला में पढ़ने आने वाले बच्चों की संख्या 69। ऐसे में एक साथ बच्चों को नहीं पढ़ाया जा सकता।
हरियाणा शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इस संबंध में अवगत करवा रखा है। पाठशाला नंबर चार वार्ड नंबर 15 में स्थित एक धर्मशाला में चल रही थी, लेकिन भवन जर्जर होने के कारण काफी समय पूर्व इसे पार्क में स्थानांतरित कर दिया गया। तभी से बच्चे पार्क में पढ़ने के लिए आ रहे हैं।
पूरा साल किताबों का इंतजार करने के बाद पाठशाला के बच्चों को करीब एक माह पूर्व एक साल पुरानी किताबें दी गई। हालांकि विभाग ने एक साल में पाठ्यक्रम भी बदल दिया है।
परीक्षा सिर पर है। ऐसे में बच्चे बिना तैयारी के किस प्रकार परीक्षा में बैठ पाएंगे।
खंड शिक्षा अधिकारी संत कुमार के अनुसार प्राथमिक पाठशाला नंबर चार का मामला उनकी नोटिस में है। पाठशाला में पढ़ने आने वाले बच्चों को पाठशाला नंबर तीन में स्थानांतरित करने की योजना है।
इस संबंध में उन्होंने उच्च अधिकारियों से अनुमति मांगी है। जहां तक किताबों का प्रश्न है, खंड डबवाली को छोड़कर जिले के शेष खंडों में किताबें आ गई हैं। सोमवार को किताबें आते ही सभी स्कूलों में वितरित कर दी जाएंगी।
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