बंदरों के एक झुंड ने सोमवार शाम को हरियाणा विधानसभा के बाहर जमकर हंगामा किया। जंगलों से निकलकर यह बंदर शाम करीब साढ़े चार बजे विधानसभा के बाहर पहुंच गए और उत्पात करने लगे। इतने सारे बंदर एकसाथ देखकर सभी डर गए। विधानसभा के गार्ड ने फटाफट चंडीगढ़ वन विभाग को इसकी सूचना दी।
वनाधिकारी बंदर पकड़ने के लिए रवाना हुए तो सेक्टर-7 पहुंचते ही उनकी बाइक खराब हो गई। फिर भी वन विभाग की एक गाड़ी में ड्राइवर मौके पर पहुंच ही गया। इन करीब 40 मिनटों के दौरान विधानसभा से बंदर भाग चुके थे। पर्यावरण निदेशक संतोष कुमार ने कहा कि वन विभाग की टीम कॉल आते ही निकल पड़ी लेकिन मौके से बंदर जा चुके थे। अब मंगलवार को सुबह इन बंदरों के ग्रुप को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जाएगा। ध्यान रहे कि हरियाणा विधानसभा के आसपास जंगल ही जंगल है, जिसकी वजह से बंदर यहां पर आते रहते हैं।
लंगूरों के किराए पर लाखों खर्च
सेक्टर-14, 15, 7, 8, 9, 27 और 28 के निवासी बंदरों के आतंक से जूझ रहे हैं, लेकिन प्रशासन इन्हें दूर करने का कोई स्थायी हल नहीं तलाश पा रहा है। बंदरों को भगाने के लिए वन विभाग ने लंगूर भी रखा हुआ है। प्रशासन के सचिवालय में भी बंदरों का आतंक है, जिसको दूर करने के लिए अलग से लंगूर किराए पर रखे हुए हैं। इसके साथ ही सेक्टर-15 के रेजिडेंट्स भी हर साल दो लंगूर किराए पर रखने का एक लाख रुपये अदा करते हैं।
सदन में भी उठ चुका है मामला
भाजपा पार्षद सतिंद्र सिंह का कहना है कि नगर निगम की सदन की बैठक में बंदरों से निजात दिलाने का मामला दो बार उठाया जा चुका है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि यह मामला प्रशासन के अंतर्गत आता है इसलिए नगर निगम कुछ नहीं कर सकता है। उनका कहना है कि सेक्टर-27 और 28 में बंदर कई लोगों पर हमला भी कर चुके हैं। सेक्टर-27 डी की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन अध्यक्ष शिखा निझावन का कहना है कि उनके एरिया में बंदरों का खूब आतंक है। कई लोग घायल हो चुके हैं।