फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट में उज्जैन के 104 वर्षीय मौनी बाबा के स्पाइन का सफल ऑपरेशन किया गया। पांच माह पहले उसकी एंजियोप्लास्टी हुई थी।
न्यूरोसर्जरी विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. संदीप वैश्य ने बताया कि बाबा पांवों और पीठ में असहनीय दर्द की शिकायत लेकर आए थे। इसको दूर करने के लिए सर्जरी ही एकमात्र विकल्प थी।
हालांकि, उनकी उम्र और पांच माह पहले की गई एंजियोप्लास्टी के कारण सर्जरी बेहद जोखिम भरी थी। उन्होंने बताया कि रीढ़ की हड्डी अनेक हड्डियों से बनी होती है, जिसे वर्टेबरा कहा जाता है।
प्रत्येक वर्टेबरा के बीच एक डिस्क होती है। कमजोरी के कारण डिस्क का भीतरी मुलायम हिस्सा डिस्क के बाहरी हिस्से में बाहर निकल आता है। इससे कमर के निचले हिस्से में भयंकर दर्द होता है। सर्जरी ही इसका इलाज है।
लेकिन मौनी बाबा की सर्जरी के बाद रीढ़ की हड्डी के ऑपरेशन के लिए उम्र का अब कोई बंधन नहीं रह गया है। इस मौके पर फोर्टिस के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. दलप्रीत बराड़ ने कहा कि न्यूरोसर्जरी की टीम ने यह सर्जरी करके अपनी श्रेष्ठता साबित कर दी है।
कौन है मौनी बाबा
उज्जैन के रहने वाले मौनी बाबा के शिष्यों की फेहरिस्त काफी लंबी है। पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्व. अर्जुन सिंह, बांसुरी वादक हरिप्रसाद चौरसिया, तबला वादक जाकिर हुसैन, फिल्म अभिनेता स्व. सुनील दत्त समेत विभिन्न क्षेत्रों में महान उपलब्धियां हासिल करने वाले लोग इनके शिष्य रह चुके हैं।