महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का हरियाणा के करीब डेढ़ हजार गांवों को लाभ ही नहीं मिला है।
इन गांवों के लोगों ने स्वयं को रोजगार के लिए पंजीकृत नहीं कराया गया है। साथ ही पिछले साल लोगों को 100 के बजाय 44 दिन का रोजगार ही मुहैया कराया जा सका है।
सिरसा और महेंद्रगढ़ जिलों में यह योजना फरवरी, 2006 में शुरू हुई थी। एक अप्रैल, 2008 से प्रदेश के सभी जिलों में यह लागू हो गई।
इसके लिए पिछले वित्तवर्ष में 434 करोड़ रुपये का बजट मंजूर हुआ था, मगर 383 करोड़ रुपये ही रिलीज हो सके।
नहीं भरे मस्टर रोल
मनरेगा के लिए जिन परिवारों को पंजीकृत किया जाता है उनके कार्ड बनाए जाते हैं। अगर कार्डधारक रोजगार मांगता है तो उसे रोजगार देना जरूरी होता है अगर रोजगार न मिले तो बेरोजगारी भत्ता देना होता है।
पिछले साल 96 फीसदी मस्टरोल ही पूरे हो सके हैं।
बड़े घोटाले की जांच नहीं हुई पूरी
मनरेगा योजना के तहत प्रदेश में 107 शिकायतें पहुंची जिनमें से अभी तक 62 का निपटारा किया गया है। अंबाला में 30 करोड़ रुपये से ज्यादा राशि के घोटाले की शिकायत हुई थी।
सोनीपत में सबसे कम रोजगार
सोनीपत जिले में सबसे कम रोजगार दिया गया है। कुल उपलब्ध बजट में सोनीपत में 34 फीसदी ही खर्च हो सका है। रोहतक में 75, रेवाड़ी में 85, पंचकूला में 82, मेवात में 67 और अंबाला में 63 फीसदी बजट खर्च हो सका है।
जिन डेढ़ हजार गांवों में मनरेगा योजना नहीं पहुंच पाई है उनमें जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। जिलों के उपायुक्त अगर रुचि लें तो मजदूरों को रोजगार मिल सकता है। मैंने उपायुक्तों से कहा है कि ज्यादा से ज्यादा मजदूरों को रोजगार दिलाने के प्रबंध करें।
- राम निवास, प्रधान सचिव, विकास एवं पंचायत, हरियाणा