हरियाणा के वित्त मंत्री हरमोहिंद्र सिंह चट्ठा ने कहा कि सरकार ने बाजार में फलाें और सब्जियों के बढ़ते मूल्यों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से फलों व सब्जियों पर लगने वाले बाजार शुल्क को पूरी तरह से हटाने की घोषणा की है। इस निर्णय से प्रदेश में किसानों और उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि फलों और सब्जियों पर बाजार शुल्क को हटाने के लिए राज्य सरकार ने बागवानी उत्पादों को हरियाणा कृषि उपज विपणन अधिनियम, 1961 की अनुसूची से बाहर निकालने का निर्णय लिया है। राज्य में बागवानी उत्पादों की आवाजाही पर भी कोई प्रतिबंध नहीं होगा।
उन्होंने बताया कि इस निर्णय के लागू होने से प्रदेश के लोगों को महंगाई से बड़ी राहत मिलेगी। इससे राज्य सरकार पर 40 करोड़ रुपये का वित्तीय भार पड़ेगा, जिसमें लगभग 20 करोड़ रुपये बाजार शुल्क और 20 करोड़ रुपये हरियाणा ग्रामीण विकास निधि के रूप में लिया जाने वाला शुल्क शामिल हैं।
उन्होंनेे बताया कि हरियाणा कृषि उत्पाद विपणन अधिनियम, 1961 की धारा 38 के अंतर्गत 51 फल एवं सब्जियां सूचीबद्ध हैं। अधिनियम के प्रावधानों के तहत हरियाणा में बागवानी उत्पादों के क्रय-विक्रय पर मार्केट कमेटी और हरियाणा ग्रामीण विकास निधि बोर्ड द्वारा एक-एक प्रतिशत का शुल्क लिया जा रहा था।
इससे पूर्व राज्य में फलों व सब्जियों पर बाजार शुल्क और एचआरडीएफ शुल्क दो-दो प्रतिशत की दर से लिया जाता था, जिसे राज्य सरकार ने एक सितंबर, 2012 से दो प्रतिशत से घटाकर एक प्रतिशत कर दिया था। अब सरकार ने इन बागवानी उत्पादों को बाजार शुल्क से पूरी से मुक्त कर दिया है।
उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का आभार व्यक्त करते कहा कि यह आम आदमी के हित में लिया गया राज्य सरकार का एक बड़ा कदम है। फलों और सब्जियों के कृषि उत्पादन विपणन समिति (एपीएमसी) अधिनियम या हरियाणा कृषि उपज विपणन अधिनियम के दायरे से बाहर होने से किसानों को अपने उत्पाद कहीं भी बेचने की छूट मिलेगी।
उपभोक्ताओं को ये कम दाम पर मिल सकेंगे, जिससे निश्चित रूप से आम आदमी को महंगाई से राहत मिलेगी। आभार व्यक्त करने वालों में पीसी सदस्य मनदीप चट्ठा, कांग्रेस के शहरी ब्लाक अध्यक्ष राकेश बधवार, ग्रामीण ब्लाक अध्यक्ष कर्मजीत सिंह चट्ठा, रामफल ककराली, नरेंद्र पुरी, चेयरमैन सुभाष रामगढ़ रोड, महंत तरण दास, अमृतपाल खिल्लन आदि शामिल हैं।