महेंद्रगढ़। यादव सभा के प्रधान के चुनाव को लेकर सबा के सदस्य अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं। एक गुट सर्व सम्मति तो दूसरा गुट मतदान से चुनाव चाहता है। यादव सभा की स्थापना व पंजीकरण के 27 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है जब सर्व सम्मति से प्रधान बनाने की राह किसी चुनौती से कम नहीं है। क्योंकि सभा की ओर से दिल्ली, राजस्थान व हरियाणा के सात जिलों में 73 वार्ड बनाए हुए हैं।
इन 73 वार्डों में सभा के सदस्य हैं जिन्हें चुनावी प्रक्रिया में शामिल होना था। दिल्ली, राजस्थान व हरियाणा के सदस्यों की ओर से सभा के प्रधान, उप प्रधान सहित कार्यकारिणी का चुनाव करना था। हालांकि इससे पूर्व वर्ष एक नवंबर 2022 को सर्व सम्मति से प्रधान नियुक्त किया गया तो कुछ लोगों द्वारा इसका विरोध भी किया गया था।
राजनीतिक हस्तक्षेप होने के कारण इस विरोध को दबा दिया गया लेकिन इस बार वर्तमान कार्यकारिणी व दूसरा पक्ष चुनावों को लेकर आमने-सामने हो गया है। हालांकि शुक्रवार को जिला फर्म एंड सोसायटी रजिस्ट्रार की ओर से दोनों पक्षों को सुनवाई के लिए नारनौल कार्यालय बुलाया गया था।
जिला रजिस्ट्रार के आदेशों के बाद एक पक्ष ने इसे राजनीति से प्रेरित बताते हुए स्टेट फर्म एंड सोसायटी रजिस्ट्रार के दरबार में अपील की तैयार कर दी। हालांकि स्टेट फर्म एंड सोसायटी रजिस्ट्रार की ओर से इस मामले में सुनवाई के लिए 24 नवंबर की तारीख निर्धारित की हुई है जिसके चलते कॉलेजियम सदस्यों के चुनाव के बाद सभा की चुनावी प्रक्रिया पर भी रोक लगा दी गई है।
वहीं हरियाणा के सात जिलों व राजस्थान तथा दिल्ली में सभा के सदस्य जुड़े होने के कारण अहीरवाल के कद्दावर नेता भी इन चुनाव पर पैनी नजर रख रहे हैं। अभी तक सभा के प्रधानी का ताज भी यादव समाज के बड़े नेताओं के हस्तक्षेप के कारण सर्वसम्मति से ही सजते आए हैं। हालांकि गत चुनावों में एक पक्ष की और से बगावती सुर छेड़े गए थे।
राजस्थान, दिल्ली व हरियाणा के साथ जिलों में हैं सभा के सदस्य
महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, झज्जर, गुरूग्राम, चरखी दादरी, भिवानी, जींद तथा दिल्ली व राजस्थान में सभा के वार्ड बने हुए हैं। सभा की ओर से 26 सितंबर से शुरू की गई चुनावी कार्रवाई के बाद 73 वार्ड बनाए थे। इनमें से 55 पर कॉलेजियम के नामांकन आए थे। इनमें से 46 कॉलेजियम सदस्य निर्विरोध चुने गए थे जबकि सभा की ओर से बनाए गए नौ वार्डों में कॉलेजियम सदस्यों के लिए दो या दो से अधिक नामांकन आए हैं। राजस्थान, दिल्ली व हरियाणा के सात जिलों को 73 वार्डों में बांटा गया है जिनमें सदस्य बनाए गए हैं जो इस चुनावी प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं।
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अहीरवाल के कद्दावर नेताओं की है पैनी नजर
राजस्थान व दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा के सात जिलों में यादव सभा के 73 वार्डों में सदस्य बने हैं। एक प्रकार से यादव सभा महेंद्रगढ़ अहीरवाल की राजनीति पर अपनी विशेष पकड़ रखती है जिसके कारण इसका राजनीति प्रभाव भी काफी माना जाता है। हरियाण, राजस्थान व दिल्ली तक यादव समाज के बड़े नेताओं की इस बार इस चुनाव को लेकर पैनी नजर है। हालांकि एक पक्ष की ओर से सर्व सम्मति से प्रधान पद के चुनाव का प्रयास किया जा रहा है तो दूसरा पक्ष इस प्रक्रिया को मतदान के आधार पर पूरी कराने के पक्ष में है। हालांकि गत 25 सितंबर को चुनाव अधिकारी की ओर से चुनावी प्रक्रिया का शेड्यूल जारी किया गया था। इसके अनुसार 26 सितंबर को मतदाता सूची का प्रकाशन, 16 अक्तूबर को नामांकन पत्र जमा कराने, 19 को नामांकन पत्रों की जांच, 23 व 24 अक्तूबर को नामांकन पत्रों की जांच, 24 को चुनाव चिह्न आवंटित कर 27 नवंबर को चुनाव की तिथि निर्धारित की गई थी। अब 24 नवंबर को स्टेट फर्म एंड सोसायटी रजिस्ट्रार की ओर इसकी सुनवाई की तिथि निर्धारित की गई है।