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महिलाओं ने चांद की दीदार कर खोला करवाचौथ का व्रत

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क्षेत्र में करवाचौथ का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया। महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु के करवाचौथ व्रत रखा। व्रत के दौरान महिलाओं ने चांद के दीदार से पहले ना तो अन्न का प्रयोग किया और न ही जल का। पति की लंबी उम्र की कामना के चलते किए जाने वाले व्रत को लेकर महिलाओं में सजने संवरने की भी होड़ लगी रही। जिसके चलते ब्यूटी पार्लरों पर महिलाओं की दिन भर भीड़ लगी रही। इस दौरान अनेक स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से एकत्रित होकर चौथ माता की कथा सुनी। रात को चांद को देखकर अर्घ्य दिया और छलनी में से चांद को देख कर चौथ माता से अपने पति की लंबी आयु की कामना की तथा परिवार जनों की सुख समृद्धि मांगी।
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परंपराओं के अनुसार इस दिन शादीशुदा महिलाएं या जिनकी शादी होने वाली हैं वो अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। ये व्रत सुबह सूरज उगने से पहले से लेकर और रात्रि में चंद्रमा निकलने तक रहता है। इसके चलते सुबह से ही महिलाओं की सजने-संवरने के लिए ब्यूटी पार्लरों पर भीड़ लगी रही। महिलाओं ने बाजारों में जाकर खूब खरीददारी की। रात्रि को चंद्र उदय होने पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर महिलाओं ने अपने पति के सामने व्रत तोड़ा। कुछ लोगों ने अपनी पत्नियों के साथ बाहर ही खाना खाया।
ज्योतिषाचार्य पंडित क्रांति निर्मल शास्त्री ने कहा कि करवा चौथ का पर्व पति-पत्नी को जोड़ने का काम करता है। इस दिन सभी सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत रखती हैं। यह व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को किया जाता है। इस बार रोहिणी नक्षत्र का संयोग होने से इस व्रत का महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि चंद्रमा की 27 नक्षत्र रूपी पत्नियों में रोहिणी उन्हें सर्वाधिक प्रिय है, ऐसे में चंद्रमा सहित रोहिणी का पूजन करना विशेष फलदायक होगा। इस दिन सभी सुहागिन स्त्रियों सुबह जल्दी स्नान कर सोलह श्रृंगार करती हैं, करवे का पूजन करके व्रत कथा सुनती है और पति की लंबी आयु हेतु पूरा दिन व्रत रखती हैं रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती है। भारतीय नारी महान है, जो अपने पति व बच्चों की लंबी उम्र के लिए इस व्रत को करती है। नारी की महानता का शास्त्रों में भी विशेष रूप से वर्णन है। कहा गया है कि जिस घर व समाज में नारी की इज्जत होती है, वहां पर देवता निवास करते हैं।
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