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अवैध मकान ढहाए तो लोगों ने बनाया सीएम का मंदिर

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नगर परिषद अधिकारियों द्वारा ढहाया गया ढांचा। संवाद - फोटो : Narnol
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रघुनाथ पुरा की पहाड़ी पर कुछ लोग कई वर्षों से अवैध तरीके से मकान बना कर रह रहे थे। एक माह पहले नगर परिषद ने मकान ढहा दिए। लोगों ने उस जगह पर मुख्य मंत्री मनोहर लाल का मंदिर बनाया और पूजा करने लगे। शुक्रवार को इसकी सूचना मिलते ही नप ने वह भी ढहा दिया। अगले ही दिन लोगों ने फिर मंदिर बनाने का प्रयास किया, दीवार बना भी ली। प्रशासन ने कड़ा संज्ञान लिया, उपायुक्त अजय कुमार के निर्देश पर नप के कार्यकारी अधिकारी अभय सिंह यादव मौके पर पहुंचे और दीवार गिरवाई। उनकी शिकायत पर महावीर चौकी पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
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गांव रघुनाथ पुरा की पहाड़ी पर करीब पचास परिवार कई सालों से घर बना कर रहे थे। उनका कहना है कि यह जमीन एक कंपनी को लीज पर दी गई है। नप ने इसे अवैध कब्जा घोषित करते हुए करीब एक माह पहले सारे घर ढहा दिए थे। उसके बाद उन्होंने सीएम का मंदिर बना कर पूजा शुरू कर दी। शुक्रवार को नप को सूचना मिली तो मंदिर गिरा दिया गया। शनिवार के लोगों ने फिर मंदिर बनाने का प्रयास किया। तब मामला प्रशासन के संज्ञान में आया। ईओ यादव ने लोगों को चेतावनी दी कि अगर भविष्य में ऐसा कुछ हुआ तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यादव की शिकायत पर पुलिस ने अवैध कब्जाधारकों के वकील प्रमोद तरेड़िया, सुरेश और 10-15 अज्ञात पर मामला दर्ज किया है।
वर्जन--
अगर भविष्य में कोई भी नागरिक सरकारी जमीन पर इस तरह मंदिर बना कर कब्जा करता पाया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। नप के संज्ञान में कोई भी मामला आया तो तुरंत कार्रवाई की जाएगी। आसपास के लोगों को भी समझाया गया है कि यह किसी हाल में जायज नहीं है कि सरकारी जमीन को इस तरह से प्रयोग किया जाए। इस संबंध में लोगों को नप को सूचना देनी चाहिए।
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- अभय सिंह यादव, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद
वह जमीन एक कंपनी गुरुग्राम फरीदाबाद माइनिंग को लीज पर दी गई है, जिसकी मियाद 2024 तक है। लोग बीस, तीस व पचास वर्षों से यहां मकान बना कर रहे थे। इस संबंध में पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिसमें जारी आदेश के तहत पहले तीस जून और फिर 31 अगस्त 2021 तक कोई भी जमीन खाली नहीं करवा सकता। इसके बावजूद नप ने मकान गिरा दिए। इसके खिलाफ भी हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई है, जिसमें नप को तीन दिन पहले नोटिस जारी हो चुका है। लोगों की सीएम में आस्था थी कि वह उन्हें बेघर होने से बचाएंगे, इसीलिए उनका मंदिर बनाया गया था। इस मामले में मेरे समेत कई लोगों के खिलाफ प्रतिशोध में पर्चा भी दर्ज कर लिया गया।
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- प्रमोद तरेड़िया, कब्जाधारकों के वकील
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