सरकार की ओर से छोटे बच्चों को स्वच्छ पेयजल मुहैया करवाने के लिए स्कूलों में आरओ लगवाने की योजना बनाई गई थी। लेकिन लचर कार्यप्रणाली के कारण यह योजना पूरी तरह परवान नहीं चढ़ पाई। इससे स्कूलों में बच्चों को फ्लोराइड युक्त पानी पीना पड़ रहा है।
जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा नारनौल सब डिवीजनल की दस स्कूलों को आरओ मशीन मुहैया करवाई गई थी। इनमें नांगल नूनियां की गर्ल प्राथमिक पाठशाला व प्राइमरी स्कूल, नांगल चौधरी में लड़की व लड़कों की प्राथमिक स्कूल, इसके अलावा शहबाजपुर, सिरोही बहाली,नांगल दुर्गु, मूसनोता, अमरपुरा व नियामतपुर की प्राइमरी स्कूल शामिल हैं। विभाग का तर्क है कि भूजल स्तर नीचे जाने से पेयजल में फ्लोराइड की मात्रा बढ़ गई। इससे पानी का स्वाद व उसकी गुणवत्ता प्रभावित हुई है।
महेंद्रगढ़ जिले को योजना के प्रथम चरण में 20 लाख मिले, इस राशि से आरओ खरीदकर स्कूलों में फिट करने की जिम्मेदारी एक निजी कंपनी को दी गई थी। कंपनी ने 10 आरओ नांगल चौधरी व 10 आरओ महेंद्रगढ़ डिवीजनल की विभिन्न स्कूलों में भेजे हैं। विभागीय आरओ एक घंटे में 100 लीटर पानी फिल्टर करने में सक्षम होगा। लेकिन विभिन्न स्कूलों के आरओ में तकनीकी खराबी के चलते बच्चों को फ्लोराइड युक्त पानी पीना पड़ रहा है।
फ्लोराइड की सामान्य मात्रा जरूरी
सीएचसी नांगल चौधरी में कार्यरत दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक सिंघानिया के अनुसार पानी में फ्लोराइड की सामान्य मात्रा होना आवश्यक है। क्योंकि इससे दांतों को कीड़े आदि रोग नहीं लगते। लेकिन अधिकता के चलते दांत व हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। इस रोग से पीड़ित लोगों के दांत समय से पहले पीले व कमजोर होकर गिरने लगते हैं। उनकी हड्डियों में चिकनाई कम होने से जोड़ दर्द करने लगते हैं इसके अलावा फ्लोराइड युक्त पानी शरीर की आंतों व आंखों को भी कमजोर करता है।
नौनिहालों की सेहत को रहता है खतरा
सीएचसी में कार्यरत चिकित्सक बिक्रम सिंह के मुताबिक फ्लोराइड का प्रभाव छोटे बच्चों के शारीरिक विकास को अधिक प्रभावित करता है। उनकी हड्डियां पतली व कमजोर होती हैं। जिनमें फ्लोराइड लवणों से छिद्र होने की संभावना बनी रहती है।