नारनौल। पन्द्रह साल में पहली बार भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट पर सबसे कम मतदान हुआ है। मतदान घटने की मुख्य वजह गर्मी को माना जा रहा है, लेकिन कम मतदान ने भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशियों की धड़कनें जरूर बढ़ा दी हैं।
नारनौल जिले की बात करें तो यहां पड़ने वाली चार विधानसभा सीटों में कांग्रेस प्रत्याशी राव दान सिंह की विधानसभा में सबसे अधिक मतदान हुआ है। ऐसे में कांग्रेस अपने आपको बढ़त में मानकर चल रही है, जबकि जिले की तीन अन्य विधानसभाएं, जिनमें भाजपा विधायक हैं, वहां पर कम वोटिंग के बावजूद हार जीत का अनुमान नहीं लग रहा है। भाजपा पार्टी के समर्थक गर्मी में कम वोटिंग के बावजूद अपनी जीत मानकर चल रहे हैं, जबकि कांग्रेस समर्थकों का मानना है कि इस बार उनके प्रत्याशी की जीत तय है। भिवानी-महेंद्रगढ़ संसदीय सीट पर 17 प्रत्याशी मैदान में हैं। इन सभी के भाग्य का फैसला ईवीएम में बंद हो गया है। मतदान के बाद सभी ईवीएम मशीनें कड़ी सुरक्षा में पीआर सेंटर में रखवा दी गई हैं। अब चार जून को ही पता चलेगा कि बाजी किसके हाथ लगने वाली है।
जिले में तीन पर भाजपा और एक पर कांग्रेस विधायक
जिले में चार विधानसभाओं में सबसे ज्यादा महेंद्रगढ़ व सबसे कम नांगल चौधरी में वोटिंग प्रतिशत हुई है। नांगल चौधरी में डॉ.अभय सिंह भाजपा विधायक हैं और महेंद्रगढ़ में राव दान सिंह कांग्रेस विधायक हैं, जो इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की तरफ से प्रत्याशी भी रहे हैं। महेंद्रगढ़ के बाद अटेली, नारनौल व नांगल चौधरी का वोटिंग प्रतिशत कम रहा है। बता दें महेंद्रगढ़ जिले में चार विधानसभा क्षेत्र हैं, जिसमें से तीन पर भाजपा का कब्जा है, वहीं एक मात्र सीट महेंद्रगढ़ कांग्रेस के पास है।
2009 में हुआ था 71.34 फीसदी मतदान
परिसीमन के बाद भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट पर पहली बार 2009 में मतदान हुआ था। इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी श्रुति चौधरी ने जीत दर्ज की थी। उस समय करीब 71.34 फीसदी वोटिंग हुई थी। वहीं 2014 व 2019 में भाजपा प्रत्याशी चौधरी धर्मबीर सिंह ने चुनाव जीता था। उस समय करीब 70 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। इस साल 2024 के लोकसभा चुनाव में करीब 65.39 फीसदी मतदान हुआ है, यह पिछले तीन चुनावों में सबसे कम है।
ईवीएम मशीन कड़ी सुरक्षा में कैद
नारनौल में ईवीएम मशीन कड़ी सुरक्षा के बीच रखी गई है। अब चार जून को मतगणना होगी। तब तक ईवीएम मशीन कड़ी सुरक्षा में रहेंगी। शनिवार को चुनावी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद देर रात तक ईवीएम मशीन जमा होती रही।