गांव सिसोठ के ग्रामीण लाखों रुपये भरने के बाद भी अपने आशियाने को तरस रहे हैं। कुछ रिटायर्ड सेना के जवानों ने अपनी सेवानिवृति के पैसे आशियाने में लगा दिए फिर भी आशियना अभी तैयार नहीं हो पाए हैं। शहरी तर्ज पर हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनी में रहने वाले ग्रामीणों के सपने अभी तक पूरे नहीं हुए हैं। गांव सिसोठ की बणी में हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के क्वार्टर खंडहर होने लगे हैं लेकिन अभी तक कॉलोनी में मूलभूत सुविधा नहीं बन पाई है। ग्रामीणों ने सुविधा के अभाव में प्रदेश सरकार के खिलाफ रोष जताया है। ग्रामीणों का कहना कि तीन श्रेणी के क्वार्टरों को दिसंबर 2013 तक तैयार करना था, क्वार्टर तैयार हो गए लेकिन उसमें बिजली, पानी, सीवरेज जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं है न ही अभी तक मालिकों को सौंपा गया है, जबकि क्वार्टर को बने हुए 2 साल से अधिक समय हो चुका है।
ग्रामीणों ने बताया कि 2008 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय में हाउसिंग बोर्ड हरियाणा ने ग्रामीणों के लिए मॉडर्न रुरल हाउसिंग स्कीम शुरू की थी। इस स्कीम के तहत ग्रामीणों को उनकी पंचायती जमीन पर क्वार्टर बनाकर उन्हें मूलभूत सुविधा देना था। इस स्कीम के तहत गांव सिसोठ के ग्रामीणों ने बोर्ड को अगस्त 2008 में पंचायत की 10 एकड़ जमीन हाउसिंग बोर्ड को दी थी। 2011 में बोर्ड ने इस कॉलोनी के फॉर्म निकाले थे जिसमें केवल इसी गांव के लोग भर सकते हैं। उस दौरान 81 ग्रामीणों ने अलग-अलग श्रेणी-1, श्रेणी-2 तथा श्रेणी-3 के क्वार्टरों के लिए 81 फॉर्म भरे थे, जिनमें सभी के फॉर्म कनफर्म हो गए। उसके बाद इन 81 उपभोक्ताओं ने बोर्ड को अप्रैल-11 और अप्रैल-12 में लाखों रुपये की दो- दो किश्तें भी जमा करवा दी है। दिसंबर 2013 तक कॉलोनी पूरी बनकर तैयार होनी थी और उपभोक्ताओं को सौंपा जाना था लेकिन क्वार्टर बने हुए दो वर्ष से अधिक का समय हो गया अभी तक मूलभूत सुविधाएं नहीं बन पाई हैं।
यह है स्थिति:
गांव सिसोठ की बणी में क्वार्टर बना दिए गए लेकिन अभी तक उसमें बिजली, पानी, सीवरेज तथा चार दीवारी नहीं बन पाई है। पानी के लिए ग्रामीणों ने जुलाई 2016 में बोर्ड के एक्सईएन एस.सी. गर्ग गुड़गांव के कहने पर पानी का लाइन के लिए सरपंच ने परमीशन देे दी थी। उसके बाद यहां काम शुरू नहीं हो पाया, इस समय यहां कंटीली झाड़ियां उगी हुई हैं और आवारा पशु यहां विचरण करते हैं।
बोर्ड ने बनाए हैं तीन श्रेणी के क्वार्टर
हाउसिंग बोर्ड ने श्रेणी-1 में वन रूम सेट, श्रेणी-2 में टू-रुम सेट तथा श्रेणी-3 में थ्री रूम सेट बनाए गए हैं। श्रेणी-1 की कीमत 10.40 लाख रुपये, श्रेणी-2 के 17.40 तथा श्रेणी-3 के 21.90 लाख रुपये हैं। शर्त के अनुसार तीन किश्त देने के बाद क्वार्टर ग्रामीणों को हैंड ओवर कर दिया जाएगा। शेष कीमत 120 किश्तों में जमा करवानी थी।
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सरकार कॉलोनी में सुविधा उपलब्ध करवाने में देर करती जा रही है। 2013 में यह काम पूरा हो जाना चाहिए था। क्वार्टर बनकर तैयार हो गए हैं तो यहां बिजली, पानी, सीवरेज आदि की व्यवस्था करवाई जानी चाहिए। सरकार जल्द से जल्द काम पूरा कर ग्रामीणों को क्वार्टर सौंपे।--महीपाल सिंह, रिटायर्ड डिप्टी कमांडेंट
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मैं 2013 में सेना से रिटायर्ड होकर आया था। मेरा मकान खंडहर हो गया है, मुझे नया मकान बनाना था जब मेरा नंबर कॉलोनी में आ गया तो मैंने अपने सारे पैसे इसमें ही लगा दिए अभी तक कॉलोनी तैयार कर क्वार्टर सौंपे नहीं गए हैं, मेरा मकान अब गिरने को हैं मैं बहुत परेशान हूं। -सतबीर, सेवानिवृत सूबेदार
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क्वार्टर नहीं मिलने के कारण हम बड़े परेशान हैं। संबंधित विभाग के अधिकारियों से इस बारे में बात करते हैं तो वो संतोषजनक जबाव नहीं देते हैं। क्वार्टर तैयार हुए 2 वर्ष का समय बीत चुका है अभी तक कोई कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई है। --शमशेर सिंह, -सेवानिवृत सूबेदार मेजर
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मुझे नया मकान बनाना था जब मेरा नंबर इस कॉलोनी में आ गया तो मैंने अपनी 2 किश्त भी भर दी। 2 साल से इसका काम पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। बोर्ड ने भवन तो तैयार कर दिए लेकिन इसमें सुविधा उपलब्ध नहीं करवा पाया है। --नरेश-रिटायर्ड पुलिस अधिकारी।
हाउसिंग बोर्ड का काम तकनीकि कारणों से रुका हुआ था। पेयजल पाइप लाइन का इस्टिमेट बनाकर तैयार कर दिया है जल्द ही टेंडर कर अगले महीने से काम शुरू करवा दिया जाएगा। पेयजल एवं सीवरेज लाइन डलवाने के बाद सड़क एवं चारदीवारी का कार्य भी साथ-साथ करवा दिया जाएगा। - एस.सी. गर्ग--एक्सईएन गुड़गांव