बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की पहल का असर अब जिले में दिखने लगा है। यही कारण है कि जिले में पिछले दो सालों में लड़कियों के जन्म में इजाफा होने लगा है तथा गली-गली, घर-घर बेटियों की किलकारियां गूंजने लगी हैं। दो सालों से लिंगानुपात में लगातार सुधार देखा जा रहा है। इस सुधार का असर आंकड़ों में साफ देखा जा सकता है। जहां वर्ष 2014 में जिले का लिंगानुपात प्रति एक हजार लड़कों के मुकाबले 738 लड़कियां थी वहीं अब 849 हो गया है। हालांकि कुछ जगह लिंगानुपात नीचे भी गया है लेकिन ओवर ऑल जिला में बढ़ोत्तरी हुई है।
जागरूकता अभियान व स्वास्थ्य विभाग की सख्ती के चलते जिले के लिंगानुपात में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है। केंद्र व प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद पानीपत में 2014 आयोजित रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करीब तीन साल पूर्व बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरूआत की थी जिसमें प्रधानमंत्री ने महेंद्रगढ़ जिले का जिक्र करते हुए यहां के लिंगानुपात पर चिंता जाहिर की थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने कमर कसते हुए जिले का लिंगानुपात सुधारने के काफी प्रयास भी किए। जिसके परिणाम स्वरूप गत कुछ वर्षों के मुकाबले जिले के लिंगानुपात काफी सुधार आया है, परंतु अभी भी जिले में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां लिंगानुपात लगातार गिरता जा रहा है। वर्ष 2015 तक जहां जिला में लिंगानुपात एक हजार लड़कों के मुकाबले 810 था, वह नवंबर 2016 तक 849 हो गया है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में हालात पहले के मुकाबले हुआ खराब
ओवर आल जिले के लिंगानुपात स्तर में इजाफा हुआ है, परंतु जिला के कुछ गांव के साथ लगती सीएचसी व पीएचसी में हालात पहले के मुकाबले खराब होते जा रहे हैं। माधोगढ़ पीएचसी में वर्ष 2015 में लिंगानुपात एक हजार लड़कों पर 744 था, जोकि वर्ष 2016 में महज 500 रह गया है। दोचाना में 2015 में 896 था, जो अब 824 है। धनुंदा में वर्ष 2015 में जहां 611 था, वह अब केवल 309 रह गया है। इसी प्रकार बामनवास में 2015 में 1200 था वह अब 750 रहा गया है। ये सभी राजस्थान की सीमा के साथ लगती पीएससी व सीएचसी हैं।
इन जगहों पर लिंगानुपात में आया सुधार
नांगल सिरोही में वर्ष 2015 में जहां लिंगानुपात महज 579 था वहां अब 869 हो गया है। इसी प्रकार कनीना पीएचसी में गत वर्ष 813 था जो अब 994 है। जबकि पीएचसी मुंडियाखेड़ा में 1083 था जोकि अब 3000 पर पहुंच गया है। पीएचसी पाली में वर्ष 2015 में लिंगानुपात मात्र 475 था, वहीं अब बढ़कर 1364 पर पहुंच गया है। इसके अलावा बलाहा कला में 750 था, वह अब 2000 है। बायल में 2015 में 846 था, जो अब 1250 हो गया है। वहीं मंढाणा में 2015 में 556 था, जो अब 1600 तथा रामपुरा पीएचसी में 2015 के 667 के मुकाबले यहां अब नवंबर 2016 तक लिंगानुपात 1500 हो गया है।
जिले में कई जगह हुई छापेमारी
जिले में गिरते लिंगापुनात को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम इस वर्ष जिले में अल्ट्रासाउंड केंद्रों व निजी अस्पतालों पर छापामार कार्रवाई करते हुए उनके खिलाफ पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया। इसमें कुछ माह पहले बिश्नोई अस्पताल पर छापामार कार्रवाई करते हुए अल्ट्रा साउंड मशीन को सील किया था तथा इसकी संचालिका नागरिक अस्पताल नारनौल में पूर्व सीएमओ के रूप में कार्यरत चिकित्सक संजय बिश्नोई की पत्नी अल्का बिश्नोई के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। वहीं महेंद्रगढ़ के एक अल्ट्रासाउंड केंद्र के लाइसेंस को सस्पेंड किया गया। इस प्रकार स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इस वर्ष जिले में कई जगह छापामार कार्रवाई कर अल्ट्रासाउंड मशीनों को सील किया है।
इस वर्ष हुए सबसे अधिक मामले दर्ज
स्वास्थ्य विभाग ने अल्ट्रासाउंड संचालकों के खिलाफ अनेक मामले दर्ज किए गए हैं। वर्ष 2014 में पीएनडीटी/एमटीपी एक्ट के तहत एक-एक मामला, 2015 में पीएनडीटी/एमटीपी एक्ट के तहत चार व दो मामले तथा इस वर्ष पीएनडीटी एक्ट के तहत सबसे अधिक 9 एवं एमटीपी एक्ट के तहत एक मामला दर्ज किया गया है। जोकि न्यायालय में विचाराधीन है।
पांच साल में अब तक सबसे ज्यादा आंकड़ा
इस बार पांच साल के मुकाबले जिले में सबसे ज्यादा कन्याओं ने जन्म लिया है। पांच साल में पहली बार लिंगानुपात का आंकड़ा 849 के पार हुआ है।
साल लिंगानुपात
2010 773
2011 735
2012 770
2013 745
2014 738
2015 810
2016 849
-आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के हैं।
जिले में गिरते लिंगानुपात स्तर को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार छापेमारी कर रहा है। जिसका परिणाम भी दिखाई देने लगा है। पिछले कुछ वर्षों के मुकाबले में वर्तमान में जिले के लिंगानुपात स्तर में काफी सुधार आया है। आगे भी विभाग की इस प्रकार की कार्रवाई जारी रहेगी।
-अशवनी रोहिल्ला उप सिविल सर्जन, नागरिक अस्पताल नारनौल