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बलाना के सीआरपीएफ जवान सुरेंद्र को ग्रामीणों ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई

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बलाना में जवान को अंतिम सलामी देते सैनिक । संवाद - फोटो : Narnol
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महेंद्रगढ़। गांव बलाना में जैसे ही सुबह सीआरपीएफ जवान सुरेंद्र का पार्थिव शरीर पहुंचा तो पूरे गांव में मातम पसर गया। अपने लाडले की झलकर पाने को ग्रामीण इंतजार में सुबह से ही रास्तों में खड़े हो गए। बुधवार को शहीद के पैतृक गांव बलाना में सेना की टुकड़ी ने जवान को अंतिम सलामी दी। सैनिक सम्मान के साथ जवान सुरेंद्र को ग्रामीणों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
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सुरेंद्र का झारखंड के दंतेवाड़ा में ड्यूटी के दौरान हृदय गति रुकने से निधन हो गया। बुधवार को उनके पैतृक गांव बलाना में सैनिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। पूर्व शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने भी सुरेंद्र गुर्जर की अंतिम यात्रा में शामिल होकर व पुष्प चक्र भेंट कर अंतिम विदाई दी।
सैन्य अधिकारियों ने बताया कि सुरेंद्र वर्ष 2011 में 230 सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। बीते 13 जून को हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गय था। सुरेंद्र के सिर से पिता का साया बचपन में ही उठ गया था। काफी संघर्ष पूर्ण जीवन में उन्होंने सीआरपीएफ में भर्ती होकर देश की रक्षा को चुना। इस मौके पर पूर्व शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने कहा कि सीआरपीएफ का जवान सुरेंद्र का हमारे बीच से जाना न केवल देश की क्षति हुई है अपितु गांव व परिवार के लिए भी यह अपूर्णिय क्षति है। सरकार द्वारा नियमानुसार स़ुरेंद्र के परिवार को सुविधाएं दी जाएगी। इस अवसर पर ग्रामीणों ने नम आंखों से शहीद सुरेंद्र गुर्जर को अंतिम विदाई दी। सुरेंद्र गुर्जर अपने पीछे पत्नी व दो पुत्रों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
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