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किसान से ग्राहकों तक पहुंचते तीन गुना बढ़ जाते सब्जियों के दाम, प्रशासन का नहीं लगाम

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सब्जी मंडी महेंद्रगढ़ में सब्जी खरीदतीं महिलाएं। - फोटो : Narnol
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किसान से सुुबह खरीदी गई सब्जी दोपहर को उपभोक्ता तक पहुंचते-पहुंचते तीन गुना महंगी हो जाती है। सब्जी के रेट शहर में एरिया के हिसाब से बदलते रहते हैं। सब्जी मंडी में थोक के रेट, मंडी में रिटेल के रेट, पॉश कालोनी के रेट, मंडी से बाहर शहर में बनी दुकानों के रेट अलग-अलग हैं। रेट को लेकर प्रशासन का कोई दखल नहीं। दुकानदार अपनी मर्जी से सब्जी के रेट तय करते हैं। सब्जी उत्पादकों से किस भाव पर सब्जी खरीदी जाएगी यह भी आढ़ती ही तय करते हैं।
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सब्जी के रेट को लेकर कोई अंदाज नहीं लगाया जा सकता। इसके रेट रोजाना तय होते हैं। सुुबह 3 बजे से सब्जी मंडी में कारोबार शुरू हो जाता है। ग्रामीण एरिया से किसान अपनी सब्जी लेकर मंडी पहुंचते हैं। यहां आढ़ती सब्जी मंडी में बोली लगाकर रेट तय करते हैं। किसान की जो सब्जी मंडी में थोक के व्यापारी 10 रुपये किलोग्राम के भाव से खरीदते हैं वह दोपहर को उपभोक्ता तक पहुंचते पहुंचते 30 रुपये किलोग्राम तक हो जाता है। सब्जी मंडी में थोक के व्यापारी से मासाखोर खरीदते हैं। इसके बाद रेहड़ी वाले सब्जी खरीदकर उसे घर तक पहुुंचाते हैं। सबसे अधिक मुनाफा रेहड़ी वाले और मासाखोर को होता है।
इस कारण भी महंगी सब्जियां
महेंद्रगढ़ जिले में सब्जी का उत्पादन बेहद कम
दूर दराज से सब्जियों की आवक के कारण ट्रांसपोर्ट का खर्च
बेमौसम बरसात, सूखे के चलते सब्जियों के रेट बढ़ जाते हैं।
जिले में सब्जियों को स्टोर करने के लिए कोल्ड स्टोरेज नहीं
पॉली हाउस में सब्जियां पैदा करने का प्रचलन नहीं
बड़े व्यापारियों की ओर से सब्जी स्टॉक कर कालाबाजारी
सब्जी के दाम पर मंडी मार्केट कमेटी का कोई नियंत्रण नहीं
8 हजार हेक्टेयर सब्जी का एरिया
जिले में सब्जी का एरिया करीब 8 हजार हेक्टेयर है। जिसमें टमाटर, गाजर का एरिया सबसे अधिक है। जिले में आलू, प्याज, मिर्च, गोभी, मूली, पालक, मैथी का थोड़ा थोड़ा एरिया है। नांगल चौधरी के गांव गोठडी में सबसे अधिक गाजर की खेती होती है। चेलावास गांव में मिर्च का बड़ा एरिया है।
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भावांतर योजना में 400 किसानों का पंजीकरण
प्रदेश सरकार ने सब्जी उत्पादक किसानों के लिए सब्जी के न्यूनतम भाव तय किए हैं। जिसमें गाजर का न्यूनतम रेट 7 रुपये किलोग्राम तय किया है। सब्जी के अधिकतम के रेट तय नहीं है। मार्केट में गाजर का रेट 7 रुपये किलोग्राम से कम मिलेगा तो सरकार उसे भावांतर योजना के तहत खरीदेगी।
सब्जी कारोबार में सबसे ज्यादा रिस्क
मार्केट कमेटी में थोक व्यापारी राजेश सैनी ने कहा सब्जी के कारोबार में सबसे ज्यादा रिस्क है। सब्जी को उसी दिन बेचना की प्राथमिकता रहती है। बची सब्जी को दूसरे दिन कोई रेट नहीं मिलता। सब्जी खराब होने का सबसे अधिक नुकसान भी होता है। सब्जी के कारोबार में कभी मुनाफा तो कभी नुकसान होता रहता है। आढ़ती तय शुल्क पर काम करते हैं। मासाखोर और रेहड़ी वाले की मेहनत और रिस्क अधिक होने के कारण उनका मुनाफा भी ज्यादा होता है।
कहीं नहीं रेट लिस्ट
सब्जी का रेट मंडी में कहीं पर लिखा नहीं मिलेगा। मासाखोर ही सब्जी का रेट बताएंगे। सब्जी के रेट मंडी में उस दिन सब्जी की आवक के हिसाब से तय होते हैं। आवक अधिक हो तो रेट कम हो जाते हैं। आवक कम हो तथा मांग अधिक हो तो रेट ज्यादा हो जाते हैं।
सब्जी के रेट के मानकों के बारे में जानकारी लेंगे। थोक व खुदरा के दाम तय होने चाहिए। किसानों को उनकी फसल का पूरा दाम मिलना चाहिए। उपभोक्ताओं को भी एक वाजिब दाम पर सब्जी मिलनी चाहिए। दोनों के बीच इस तरह की व्यवस्था बनाने के लिए काम कराएंगे।
डालू सिंह, चेयरमैन, मार्केट कमेटी
किसानों को उनकी सब्जियों का उचित दाम मिलना चाहिए। जिला उद्यान विभाग ने इसके लिए भावांतर योजना शुरू की हुई है। किसानों को अधिक फायदा हो इसके लिए सरकार किसानों को बाजार उपलब्ध कराने पर भी मंथन कर रही है। जसिमें मंडियों में कुछ जगह किसानों के लिए चिन्हित करने की तैयारी है।
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मनदीप यादव, जिला उद्यान अधिकारी, महेंद्रगढ़।
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